यमन में सैन्य कार्रवाई तेज, नागरिक ठिकानों पर हमलों का गंभीर आरोप

Nura Basta3 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में सैन्य कार्रवाई तेज, नागरिक ठिकानों पर हमलों का गंभीर आरोप

यमन की वर्तमान स्थिति एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गई है, क्योंकि हाल ही में यमन सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीवन अत्यधिक प्रभावित हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में जमीन पर क्या स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों के क्या दावे हैं।

सऊदी नीत सैन्य अभियानों पर बड़े दावे

यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारे ने हाल ही में एक बयान जारी कर सनसनी फैला दी है। उनके अनुसार, हालिया सैन्य गतिविधियों के दौरान देश भर में कई नागरिक ठिकानों को हवाई हमलों और मिसाइल हमलों का शिकार बनाया गया। इस सिलसिले में विभिन्न गवर्नरेट्स जैसे कि सना, सादा, ताइज, हज्जा, अमरान और इब्ब में बड़े पैमाने पर बमबारी किए जाने की बात कही गई है।

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प्रवक्ता का दावा है कि इन अभियानों में आधुनिक लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया, जिन्होंने पड़ोसी देश के विभिन्न एयरबेस से उड़ान भरी थी। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों से मिसाइलें भी दागे जाने की बात कही गई है। इन हमलों के कारण स्थानीय बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं, जिसमें शैक्षणिक संस्थान, संचार नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।

गठबंधन और अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, स्थिति का दूसरा पहलू भी है। यमन में वैधता का समर्थन करने वाले गठबंधन ने भी अपनी सैन्य गतिविधियों की जानकारी दी है। गठबंधन के अनुसार, उनके रक्षा तंत्र ने देश की ओर दागे गए कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इसके अलावा, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सैन्य प्रतिनिधियों ने भी अपने अभियानों का ब्योरा दिया है, जिसमें विपक्षी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है।

मानवीय चिंताएं और आगे की राह

इस लगातार बढ़ती हिंसा और सैन्य टकराव के बीच मानवीय संगठनों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े उच्च अधिकारियों ने सभी संबंधित पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। उनका जोर इस बात पर है कि किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि मानवीय आपदा को और गहराने से रोका जा सके।

बहरहाल, इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यमन की शांति प्रक्रिया कितनी नाजुक स्थिति से गुजर रही है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय वार्ताओं का रुख क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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