यमन के ताइज़ में हवाई हमले तेज़, हूती ठिकानों पर सरकारी विमानों की नौ बमबारी

ताइज़, यमन: यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने दावा किया है कि 13 अक्टूबर 2026 को उसके युद्धक विमानों ने ताइज़ प्रांत में हूती बलों और उनके सैन्य उपकरणों पर नौ हवाई हमले किए। इसी दिन यमन में हवाई हमलों और संघर्ष की खबरों ने एक बार फिर इलाके के हालात को गर्म कर दिया है।
किन इलाकों में हुए हमले
सरकार के मुताबिक, इन नौ हमलों में से पाँच ढुबाब ज़िले में और चार अल-मसरख ज़िले में किए गए। इसके अलावा सरकार ने यह भी पुष्टि की कि उसी दिन सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन के विमानों ने सना, ताइज़ और अल-जौफ में हूती ठिकानों पर अलग से हवाई हमले किए।
दूसरी तरफ़ हूती बलों ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया है कि उसने 24 घंटों के भीतर यमन के कई प्रांतों में 54 हवाई हमले किए हैं।
सऊदी अरब की चेतावनी और हवाई अड्डे पर असर
यह पूरा घटनाक्रम उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाले हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों का "कड़ा जवाब" देने की बात कही थी। इसी बीच किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर संचालन का निलंबन शनिवार तक बढ़ा दिया गया है। एयरपोर्ट को हाल के हूती हमलों में नुकसान पहुँचा था और हताहत भी हुए थे।
ताइज़ की घेराबंदी और ज़मीनी हालात
रिपोर्टों के अनुसार हूती बलों ने ताइज़ की घेराबंदी और तेज़ कर दी है। हूती पक्ष का दावा है कि उसने अल-मसरख ज़िले और नज्द कासिम इलाके पर कब्ज़ा कर लिया है। साथ ही शहर के दक्षिण-पश्चिमी प्रवेश मार्ग माने जाने वाली वादी अल-ढुबाब सड़क पर उसका नियंत्रण हो गया है।
पिछले 24 घंटों में इन झड़पों और हवाई हमलों में दर्जनों लोग मारे गए या घायल हुए, जिनमें ज़्यादातर हूती लड़ाके बताए गए हैं।
आम लोगों पर बढ़ता मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने 13 अक्टूबर को ताइज़ में बिगड़ते मानवीय हालात को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की। संस्था के अनुसार अगस्त से अब तक इस प्रांत से 1,72,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं।
सड़कों पर लगी रोक और जारी संघर्ष के कारण नागरिकों की आवाजाही, मानवीय सहायता की पहुँच और वाणिज्यिक सामान की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इससे वस्तुओं की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और ईंधन की किल्लत की खबरें हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती दिलचस्पी
इस संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी बढ़ती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती गुट की कार्रवाइयों की सार्वजनिक आलोचना की है और संकेत दिए हैं कि वे इस समूह के खिलाफ हमलों में अमेरिकी भागीदारी पर विचार कर रहे हैं।
इसके जवाब में हूती सैन्य प्रवक्ता याहया सारी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका सऊदी अरब की अगुवाई वाले अभियान में शामिल होता है, तो उसे "तेज़ और दर्दनाक जवाब" झेलना पड़ेगा।
वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि तेहरान युद्धरत पक्षों के बीच बातचीत कराने के लिए अपने अच्छे प्रभावों का इस्तेमाल करने को तैयार है।