यमन के Taiz में फिर भड़की हिंसा, जंग के कारण लगभग 50,000 लोग हुए बेघर और लाचार.

यमन के पश्चिमी हिस्से में लड़ाई अचानक फिर से तेज हो गई है, जिसकी वजह से पिछले कुछ दिनों में लगभग 50,000 लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। ताजा हालात के मुताबिक, 12 सितंबर 2026 तक सामने आई रिपोर्ट्स में यह बात साफ हुई है कि ताएज यानी Taiz शहर में मानवीय संकट बहुत ज्यादा गंभीर हो चुका है। हजारों की संख्या में परिवार इस वक्त खुले आसमान के नीचे अस्थाई कैंपों में रहने को मजबूर हैं और उनके पास खाने के लिए अनाज, पीने का साफ पानी और जरूरी सामान की भारी कमी बनी हुई है।
हालात हुए बेकाबू, हर घंटे बढ़ रही है विस्थापितों की संख्या
अल जजीरा के पत्रकार Yasser Hassan ने जमीन पर जाकर रिपोर्ट दी है कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे आम परिवारों की मुसीबतें और भी ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन यानी IOM ने 11 सितंबर को जानकारी दी थी कि ताएज और होदेइदाह गवर्नरेट में कुल 46,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। राहत और बचाव कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा हर गुजरते घंटे के साथ तेजी से बढ़ रहा है। यह पूरी स्थिति उस वक्त बिगड़ी जब 3 सितंबर से लड़ाई में अचानक भारी तेजी आ गई, जिससे मकबानह, जबल हबाशी और अल माअफर जैसे इलाके सीधे तौर पर प्रभावित हुए। विस्थापन शिविरों को देखने वाली सरकारी यूनिट के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले 10 सितंबर को 2,398 परिवार बेघर हुए, जिनमें सिर्फ Taiz प्रांत के 823 परिवार शामिल थे।
सड़कें बंद होने से राहत सामग्री पहुंचाना हुआ मुश्किल
रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाने वाली मोखा-ताएज सड़क को बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों तक जरूरी जीवन रक्षक सहायता पहुंचाने का काम बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA ने इस मामले में गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए कब्जे वाले लाल सागर के मोखा बंदरगाह से जान बचाकर भागे लोग भारी सुरक्षा समस्याओं और फोन-इंटरनेट जैसी सेवाओं के ठप होने के बीच जीने को मजबूर हैं। OCHA की रिपोर्ट के अनुसार हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।
हालात को देखते हुए IOM ने अपने कामकाज की गतिविधियों को फिलहाल रोक दिया है, जबकि महानिदेशक Amy Pope ने आम नागरिकों और राहत कर्मियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षित और बिना किसी रोक-टोक के रास्ता देने की मांग की है। इस ताजा लड़ाई से पहले ही यमन के हालात बहुत खराब थे। देश में पहले से ही लगभग 5.2 मिलियन यानी 52 लाख लोग अपने ही देश के अंदर अलग-अलग जगहों पर शरणार्थी बनकर रह रहे थे, जबकि करीब 22.3 मिलियन लोगों को जिंदा रहने के लिए मानवीय मदद की सख्त जरूरत थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की रिपोर्ट बताती है कि देश के सिर्फ 60% स्वास्थ्य केंद्र ही इस समय पूरी तरह से काम कर रहे हैं, जिससे घायल लोगों का इलाज करने में अस्पतालों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संगठन अब इस इलाके में तेजी से बिगड़ते हालातों से निपटने के लिए तुरंत दखل देने की अपील कर रहे हैं। IOM की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।