यमन के ताइज़ प्रांत में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण लड़ाई तेज होने से हजारों लोग बेघर हुए
यमन के ताइज़ प्रांत में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच जंग तेज हुई है, जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं और मानवीय संकट गहरा गया है।

ताइज़ (यमन): यमन के ताइज़ प्रांत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच जंग काफी तेज हो गई है। इस भीषण लड़ाई की वजह से हजारों आम नागरिक अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी जारी की है।
सबसे ज्यादा सैन्य टकराव ताइज़ शहर के पुराने हवाई अड्डे के आसपास देखा गया है, जिससे रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की मदद से सरकार की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने शहर के दक्षिण, पश्चिम और उत्तर दिशाओं में हूतियों की बढ़त को रोक दिया है।
सरकारी सैन्य सूत्रों के मुताबिक, झड़पों और गठबंधन के हवाई हमलों में 98 हूती लड़ाके मारे गए और 148 घायल हुए। दूसरी तरफ, हूती मीडिया ने अल-नशमा इलाके में तीन हवाई हमलों की जानकारी दी है। 20 अक्टूबर को एक रिहायशी इलाके में हूती मिसाइल हमले में दो किशोर लड़कियों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हुए।
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने करीब 744 सैन्य अभियान चलाए, जिसमें 200 हूती लड़ाकों के मारे जाने और 90 वाहनों के तबाह होने की बात कही गई है। वहीं, हूतियों ने सऊदी अरब पर इसी दौरान 93 हवाई हमले और एक मिसाइल हमला करने का आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने अगस्त की शुरुआत से अब तक 251 नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है। इनमें 57 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से आधी संख्या बच्चों की है, जबकि 194 लोग घायल हुए हैं। अगस्त से पूरे यमन में लगभग 2.60 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से करीब आधे ताइज़ में शरण ले रहे हैं।
ताइज़ में हूतियों द्वारा लगाए गए नाकेबंदी के कारण मानवीय संकट और गहरा गया है। ताइज़-अदन कॉरिडोर जैसे मुख्य आपूर्ति मार्ग बंद होने से जरूरी सामान की पहुंच रुक गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क और प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने इस नाकेबंदी की कड़ी निंदा की है।
यहां के लोग पानी, ईंधन, ताजा भोजन और दवाओं की भारी किल्लत झेल रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईंधन और आपूर्ति की कमी के कारण अस्पतालों में नवजात शिशुओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। साथ ही, कचरा न उठने की वजह से बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है।
यूनिसेफ प्रतिनिधि अखिल अय्यर ने बताया कि विस्थापित लोग ऐसे शिविरों में पहुंच रहे हैं जहां पहले से ही भीड़ ज्यादा है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने इस स्थिति को एक बड़ी चिंता बताया है।