यमन के ताइज क्षेत्र में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण लड़ाई, गोलाबारी में कई नागरिक मारे गए

ताइज (यमन): यमन के ताइज क्षेत्र में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य संघर्ष काफी तेज हो गया है। इस लड़ाई के बीच आम नागरिकों की जान जा रही है और इलाके में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
ताइज के साबीर अल-मावादिम जिले में हूतियों की गोलाबारी में तीन नागरिकों की मौत हो गई। मरने वालों में 28 साल के सफवान सईद उबेद, 55 साल की एशिया अब्दुलसमद सईद अहमद और सफिया हज्जा सैफ अल-बादानी शामिल हैं। इस हमले में पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा अल-शाकाब और अकाका इलाकों में हुई गोलाबारी में पांच और नागरिक जख्मी हुए। ताइज मानवाधिकार केंद्र ने स्नाइपर फायरिंग और आर्टिलरी हमलों में भी हताहतों की जानकारी दी है।
यमनी सेना ने बताया कि अल-शाकाब फ्रंट पर हूतियों ने बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसे आठ घंटे की लड़ाई के बाद नाकाम कर दिया गया। ताइज मिलिट्री एक्सिस के मुताबिक इस मुठभेड़ में 16 हूती मारे गए। सरकारी बलों ने अल-हंगर चेकपॉइंट और अल-दबाब में अल-मकबाबा और अल-कामिल पहाड़ियों के पास हूती ठिकानों पर हवाई हमले भी किए। साथ ही अल-अकरुद-कहलन फ्रंट से हूती ड्रोन टीम को पकड़ा गया है।
दूसरी तरफ सादा प्रांत में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने दो बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने की पुष्टि की है। इससे पहले हूती समर्थित अल-मसीराह टीवी ने 17 अक्टूबर को सऊदी हवाई हमलों की खबरें दी थीं।
हूती विद्रोही यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज की घेराबंदी सख्त कर रहे हैं और अदन जाने वाले मुख्य रास्तों को रोक रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री माईन अब्देलमालिक सईद ने चेतावनी दी है कि यह समूह ग्रामीण इलाकों पर नियंत्रण कर पूरी तरह से नाकाबंदी करने की कोशिश कर रहा है।
इस हिंसा के कारण भारी विस्थापन हुआ है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के अनुसार देश भर में 2.33 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से 1.21 लाख अकेले ताइज प्रांत के हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने पहुंच और सामान की कमी को लेकर चेतावनी जारी की है।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने बताया कि 14 अक्टूबर तक बंद सड़कों की वजह से 8 लाख लोगों तक मदद नहीं पहुंच पाई है। इनमें ताइज के 6 लाख लोग हैं जिन्हें गेहूं के आटे और भोजन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक इलाके के 12 बड़े अस्पतालों में केवल चार दिन का ईंधन बचा है।
आर्थिक हालात भी बदतर हो गए हैं। स्टडीज एंड इकोनॉमिक मीडिया सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार 20 लीटर ईंधन की कीमत बढ़कर लगभग 1 लाख यमनी रियाल तक पहुंच गई है। यूनिसेफ ने कहा है कि आवाजाही पर पाबंदियों की वजह से परिवारों और बच्चों के लिए भोजन और दवाइयां जुटाना मुश्किल हो गया है।