यमन के तइज़ में भीषण युद्ध: 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत सरकारी सेना का बड़ा हमला

Nura Basta7 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन के तइज़ में भीषण युद्ध: 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत सरकारी सेना का बड़ा हमला

यमन के तइज़ प्रांत में एक बार फिर जंग की आग भड़क उठी है। सरकारी गठबंधन की सेना ने 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य राज्य संस्थानों को बहाल करना और राजधानी सना पर फिर से नियंत्रण पाना है। तइज़ शहर के दक्षिणी हिस्सों में सैन्य विमानों द्वारा किए गए हवाई हमलों ने इस संघर्ष को और तेज कर दिया है, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया है।

सरकारी बलों ने अल-मावासत जिले के कुड्स गांव और अल-वाज़िया जिले के केंद्र के पास हूती ठिकानों को निशाना बनाया है। होमलैंड शील्ड और नेशन शील्ड फोर्स जैसी इकाइयों ने रणनीतिक बढ़त हासिल करने का दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 6 अक्टूबर को जब सेना ने जबल हबाशी जिले की एक महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटी पर कब्जा किया, तो हूती लड़ाकों में खलबली मच गई। इसके बाद 7 अक्टूबर को एक ड्रोन हमले ने अल-वाज़िया मोर्चे पर हूती स्थिति को और कमजोर कर दिया। सरकारी बलों ने थमाद, अल-काइमा और अल-मुकाइलाट पर्वत श्रृंखलाओं से भी विद्रोहियों को खदेड़ दिया है, जिसमें हूतियों को भारी जन-धन की हानि हुई है।

हूतियों की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय चिंता

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दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने दावा किया है कि उन्होंने लहज क्षेत्र में सऊदी समर्थित बलों पर दर्जनों हमले किए हैं, जिसमें 200 से अधिक लोग हताहत हुए हैं। हूतियों ने केवल यमन ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों को भी निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा, अदन के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो मिसाइलें दागी गईं, हालांकि वहां किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने चेतावनी दी है कि वे सऊदी बुनियादी ढांचे और इस युद्ध में शामिल होने वाले किसी भी विदेशी देश के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखेंगे।

इस भीषण हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस के अनुसार, इस ताजा तनाव के कारण अब तक लगभग 1,000 लोगों की मौत हो चुकी है, 4,200 से अधिक घायल हुए हैं और करीब 1.98 लाख लोग विस्थापित हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने भी आम नागरिकों को होने वाले खतरे के प्रति आगाह किया है।

इस बीच, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमनी सशस्त्र बलों को पूर्ण परिचालन समर्थन देने का वादा किया है। वहीं, मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब में अपनी सेना तैनात करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह सैन्य संघर्ष, जो मुख्य रूप से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और लाल सागर तट पर केंद्रित है, अप्रैल 2022 के युद्धविराम के बाद सबसे बड़ा सैन्य उछाल माना जा रहा है।

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