यमन के ताइज़ में जंग का कहर: आसमान छूती कीमतें और खाने की भारी किल्लत

Nura Basta6 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन के ताइज़ में जंग का कहर: आसमान छूती कीमतें और खाने की भारी किल्लत

यमन के ताइज़ शहर में हालात बेहद नाजुक हो गए हैं। सरकारी सेना और हुथी विद्रोहियों के बीच छिड़ी भीषण जंग ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। इस संघर्ष के कारण न केवल बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, बल्कि बाजार में खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो गई है और कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम आदमी के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने उनकी सीमित आय को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

संकट की शुरुआत तब और गहरी हो गई जब 5 अक्टूबर 2026 को हुथी विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'तुर्बाह' शहर पर कब्जा कर लिया। यह इलाका ताइज़ को अदन बंदरगाह से जोड़ने वाले मुख्य आपूर्ति मार्ग पर स्थित है, जिसके बंद होने से रसद की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा और महज दो हफ्तों के भीतर गेहूं के आटे की कीमतों में 10% का उछाल देखा गया, जबकि वनस्पति तेल की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है।

भूख और मानवीय संकट का भयावह रूप

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वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) की रिपोर्ट ने इस स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में लगभग 74% परिवार अपनी बुनियादी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हैं, जो इस साल का सबसे बुरा आंकड़ा है। WFP ने चेतावनी दी है कि खाद्य असुरक्षा तेजी से बढ़ रही है और इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 109 मिलियन डॉलर की तत्काल फंडिंग की मांग की है।

युद्ध के कारण सड़कों की बंदी ने मानवीय सहायता के रास्ते भी बंद कर दिए हैं। करीब 3.5 लाख लोग ऐसे हैं जिन तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। इसी बीच, राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने हुथी नियंत्रण वाले क्षेत्रों को वापस पाने के लिए एक बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि दक्षिणी ताइज़ में विद्रोहियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

हिंसा का असर केवल भूख तक सीमित नहीं है। यमन के मानवाधिकार मंत्रालय और नेटवर्क फॉर राइट्स एंड फ्रीडम ने बताया कि केवल 24 घंटों के भीतर 61 मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज किए गए, जिनमें आम नागरिकों की मौत और घरों का विनाश शामिल है। यदि अस्थिरता इसी तरह जारी रही, तो WFP की योजना अपनी मदद का दायरा बढ़ाकर 15 लाख लोगों तक पहुंचने की है ताकि इस मानवीय त्रासदी को कम किया जा सके।

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