यमन के तइज़ में ईंधन और दवाओं की भारी किल्लत से संकट गहराया और हजारों मरीजों की जान को है खतरा
WHO ने यमन के तइज़ में ईंधन और दवाओं की भारी कमी की चेतावनी दी है, जिससे हजारों मरीजों की जान को खतरा है।

तइज़ (यमन): युद्ध से जूझ रहे यमन के तइज़ प्रांत में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, तइज़ शहर के 42 स्वास्थ्य केंद्रों में ईंधन, ऑक्सीजन, दवाओं और जरूरी मेडिकल सामान की भारी कमी हो गई है, जिससे वहां मानवीय संकट खड़ा हो गया है।
अस्पतालों को चलाने के लिए हर महीने 1.56 लाख लीटर से ज्यादा ईंधन की जरूरत है। इस ईंधन का इस्तेमाल एम्बुलेंस चलाने, ऑक्सीजन बनाने और टीकों को सुरक्षित रखने वाले कोल्ड चेन सिस्टम को चालू रखने के लिए किया जाता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल 1,110 से ज्यादा किडनी के मरीज रोजाना डायलिसिस पर हैं, 192 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं और 154 नवजात बच्चे इनक्यूबेटर पर निर्भर हैं।
तइज़ ऑफिस ऑफ ब्लॉकेड अफेयर्स ने इसे एक बड़ी तबाही बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्य रास्तों पर हूती विद्रोहियों द्वारा लगाई गई नाकाबंदी की वजह से मानवीय सहायता और जरूरी सामान की सप्लाई रुक गई है।
अगस्त की शुरुआत से सैन्य संघर्ष बढ़ने के कारण देश भर में करीब 2.60 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से लगभग आधे लोग तइज़ प्रांत में शरण ले रहे हैं। डीजल की कमी से पानी पंप करने और सफाई व्यवस्था भी ठप हो गई है, जिससे 30 लाख लोग प्रभावित हैं। इनमें 16 लाख बच्चे शामिल हैं।
यूनिसेफ ने बताया कि इस साल प्रांत में 52,000 से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए हैं। रास्तों के बंद होने के कारण उन तक उपचारात्मक भोजन नहीं पहुंच पा रहा है।
सड़कों पर कचरे के ढेर जमा होने से स्वास्थ्य अधिकारियों ने बीमारियों के फैलने का डर जताया है। अब्दुलरहमन अल-सबरी समेत अन्य अधिकारियों ने डेंगू और हैजा जैसी बीमारियों के प्रसार को लेकर चिंता जताई है।
यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जरूरी रास्तों को तुरंत खोलने की मांग की है ताकि सहायता सामग्री बिना किसी रुकावट के पहुंच सके। हालांकि, कुछ मानवीय संगठनों ने जोखिम भरे वैकल्पिक रास्तों के जरिए अल-थौरा अस्पताल जैसे केंद्रों तक आपातकालीन दवाएं पहुंचाई हैं।