यमन: तइज़ में हूती हमले नाकाम, सेना ने कई मोर्चों पर पलटवार किया

तइज़, यमन: यमन की सरकार समर्थित सेनाओं ने 10 अक्टूबर 2026 को तइज़ शहर के पूर्वी मोर्चे और शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित कलाबा मोर्चे पर हूती विद्रोहियों के हमलों को नाकाम कर दिया। यमन तइज़ पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच यह खबर ऐसे समय आई है जब कई मोर्चों पर लड़ाई तेज़ हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि देश एक बार फिर पूर्ण पैमाने के युद्ध की स्थिति में लौट आया है। ज़मीनी हालात भी इसी ओर इशारा करते हैं। सरकारी सेनाओं ने अल-मसराख जिले पर नियंत्रण हासिल कर लिया है, जबकि अल-बीरीन के पास हूती बढ़त को रोक दिया गया है।
अल-शक़ब में भीषण संघर्ष
तइज़ के दक्षिण में स्थित अल-शक़ब इलाके में सबसे भीषण झड़पें दर्ज की गईं। हूती विद्रोही रणनीतिक महत्व वाले जबल साबिर पहाड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसी इलाके में सेना और विद्रोहियों के बीच सबसे कड़ा मुकाबला देखने को मिला।
इससे पहले 9 अक्टूबर को सरकारी सेनाओं ने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य और पेरिम द्वीप के आसपास के इलाकों पर फिर से कब्ज़ा करने का दावा किया था। हूती प्रवक्ताओं ने इन क्षेत्रीय दावों को खारिज किया है, इसलिए ज़मीन पर असली स्थिति को लेकर दोनों पक्षों की बातों में फर्क है।
तइज़ के लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता मानवीय हालात की है। हूती आंदोलन ने कई अहम आपूर्ति मार्ग काट दिए हैं, जिससे भोजन, ईंधन और दवाइयों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ रहा है।
इस बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन ने 10 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया। इसमें हूती नियंत्रित इलाकों में 136 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। इसके अलावा हज्जा ज़िले के अबस इलाके और होदैदा में यमन पेट्रोलियम कंपनी की एक सुविधा पर हवाई हमले हुए, जिनमें तीन लोगों के घायल होने की खबर है।
ब्रिटेन ने हूती गतिविधियों में आई इस तेज़ी की कड़ी निंदा की है। उसने खासकर तइज़ शहर की घेराबंदी को क्षेत्रीय सुरक्षा और यमनी लोगों की भलाई के लिए गंभीर खतरा बताया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या तइज़ तक राहत सामग्री पहुंचाने का कोई रास्ता खुलता है।