यमन के तइज़ में हूती घेराबंदी कसने से मानवीय संकट गहराया, संयुक्त राष्ट्र ने चेताया

तइज़ (यमन): यमन की सरकारी सेनाएं तइज़ शहर में अब भी घिरी हुई हैं और हूती बलों ने 12 अक्टूबर 2026 को शहर के चारों प्रवेश मार्ग बंद कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि शहर में गेहूं और आटे का भंडार तीन हफ्ते से कम में खत्म हो सकता है।
हूती बलों ने 4 अक्टूबर को अल-तुराब पर कब्ज़ा किया था, जिससे अदन तक जाने वाला मुख्य आपूर्ति मार्ग कट गया। इसके बाद से शहर में सामान पहुंचना लगातार मुश्किल होता गया है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने 13 अक्टूबर 2026 को तइज़ की स्थिति को भयावह मानवीय संकट बताया। उनके मुताबिक खाद्य कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, पेट्रोल की कीमत तीन गुना हो गई है और रसोई गैस लगभग मिल नहीं रही।
ईंधन की कमी से पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय और तइज़ के प्रांतीय स्वास्थ्य कार्यालय ने बताया कि डीज़ल और चिकित्सा सामग्री की कमी से स्थानीय अस्पताल बंद होने के कगार पर हैं। इससे नवजात देखभाल, डायलिसिस और आपातकालीन सर्जरी जैसी सेवाएं खतरे में पड़ गई हैं।
तइज़ के गवर्नर नबील शमसान ने सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने और घेराबंदी हटवाने की अपील की है। यमन के मानवाधिकार मंत्रालय के तइज़ कार्यालय ने बताया कि सोमवार को समाप्त 24 घंटों में हूती गोलाबारी से आवासीय इलाकों में छह नागरिकों की मौत हुई और 18 लोग घायल हुए।
सितंबर की शुरुआत में लाल सागर तट पर संघर्ष तेज़ होने के बाद विस्थापन भी बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार अगस्त से अब तक तइज़ प्रांत से 1,72,000 लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से 80,000 लोग ताज़ा लड़ाई के दौर में निकले। सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने अल-दबाब और अल-मिसराख जैसे इलाकों में हूती बढ़त रोकने के लिए हवाई हमले किए हैं।
WFP, WHO और OCHA जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां इस संकट पर नज़र रखे हुए हैं, लेकिन घेराबंदी के चलते उनकी पहुंच बेहद सीमित बनी हुई है।