हूती हिरासत में UN कर्मचारी की मौत, यमन पीएम और संयुक्त राष्ट्र ने जताया कड़ा विरोध
यमन के पीएम और UN ने हूती मिलिशिया की हिरासत में UN कर्मचारी मोहम्मद इब्राहिम अल-शमी की मौत की कड़ी निंदा की है।

सना: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के कर्मचारी मोहम्मद इब्राहिम अल-शमी की हूती मिलिशिया की हिरासत में मौत हो गई है। इस घटना पर यमन के प्रधानमंत्री शया अल-ज़िंदानी और संयुक्त राष्ट्र ने गहरा दुख जताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
प्रधानमंत्री अल-ज़िंदानी ने इस मौत के लिए हूती मिलिशिया को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में शामिल लोगों की कानूनी जवाबदेही तय की जाए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सभी अगवा और लापता व्यक्तियों की रिहाई के लिए दबाव डालें।
मोहम्मद इब्राहिम अल-शमी को 6 जून 2024 को हूतियों ने अवैध रूप से हिरासत में लिया था। बताया गया है कि उनकी मौत 31 अक्टूबर 2026 की घोषणा से एक महीने पहले ही हो गई थी, लेकिन उनके परिवार को इसकी सूचना बहुत बाद में दी गई।
हूती अधिकारियों ने अब तक अल-शमी का शव उनके परिवार को नहीं सौंपा है। साथ ही, उनकी मौत के कारणों या परिस्थितियों के बारे में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस घटना को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया है। तुर्क ने हूती अधिकारियों से पूरी पारदर्शिता बरतने और सभी मेडिकल व डिटेंशन रिकॉर्ड जारी करने की मांग की है। उन्होंने इस मामले की तत्काल, स्वतंत्र और गहन जांच की अपील की है।
मानवाधिकार मंत्री मुशदल उमर ने कहा कि यमन का मानवाधिकार मंत्रालय इस कर्मचारी के अपहरण, जबरन गायब करने और उसके बाद हुई मौत के लिए हूतियों को जिम्मेदार मानता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैद के दौरान परिवार को बंदी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में 70 से अधिक संयुक्त राष्ट्र कर्मी हूतियों की हिरासत में हैं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इन कर्मियों की हिरासत के कारण यमन के लोगों को जरूरी मानवीय और मानवाधिकार सहायता पहुंचाने में भारी बाधा आ रही है।