यमन में फिर भड़की हिंसा, UNICEF की रिपोर्ट में बच्चों में कुपोषण बढ़ने का हुआ बड़ा खुलासा.

यमन में नए सिरे से भड़की हिंसा ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है और बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। संयुक्त राष्ट्र बाल एजेंसी यानी UNICEF ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि देश में चल रहे संघर्ष की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच लगभग खत्म हो गई है। जिनेवा में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यमन में UNICEF के देश प्रतिनिधि Akhil Iyer ने बताया कि यह संघर्ष देश में भुखमरी को बहुत ज्यादा बढ़ा रहा है, जिससे बच्चे हिंसा के बीच और भी ज्यादा असुरक्षित हो गए हैं। इस पूरी जानकारी के बारे में आप विस्तार से QNA News की आधिकारिक रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।
मोबाइल टीमों की जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मोबाइल पोषण टीमों ने सुरक्षित इलाकों में रहने वाले लगभग 2,900 बच्चों की जांच की। इस मेडिकल स्क्रीनिंग से यह बात सामने आई कि उनमें से 25 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार थे। इनमें से 200 बच्चे ऐसे थे जो सबसे खतरनाक और गंभीर रूप से कुपोषण से जूझ रहे थे। पूरे देश की बात करें तो UNICEF का अनुमान है कि इस साल पांच साल से कम उम्र के करीब 2.2 मिलियन यानी 22 लाख बच्चों को तीव्र कुपोषण का सामना करना पड़ेगा। इसमें पांच लाख से अधिक ऐसे बच्चे शामिल हैं जो इस बीमारी के सबसे घातक रूप से पीड़ित हैं। इस संकट से निपटने के लिए एजेंसी अपनी आपातकालीन सेवाओं का दायरा बढ़ा रही है ताकि मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, पानी की आपूर्ति और बाल सुरक्षा सेवाओं के जरिए कुल 231,000 लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।
हिंसा और गोलाबारी से विस्थापन का बड़ा संकट
यमन में गृहयुद्ध एक बार फिर तेज हो गया है जबकि साल 2022 से हालात में थोड़ी स्थिरता देखने को मिली थी। इस ताज़ा संघर्ष की वजह से पिछले तीन हफ्तों में लगभग 130,000 से 134,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इन विस्थापितों में अनुमानित 71,000 बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों को दक्षिण-पश्चिमी गवर्नरेट ताइज़ से पलायन करना पड़ा है। इसके अलावा, 3 सितंबर से लेकर अब तक UNICEF ने इस बात की पुष्टि की है कि मुख्य रूप से गोलाबारी और हमलों के कारण कम से कम 15 बच्चों की मौत हो चुकी है, 14 बच्चे घायल हुए हैं और 3 बच्चे अभी भी लापता हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा गहरा असर
इस भयानक हिंसा ने बच्चों की पढ़ाई को भी बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार हो रहे हमलों और सुरक्षा के खतरों के कारण कुल 243 स्कूलों को बंद करना पड़ा है। स्कूलों के बंद होने से लगभग 140,000 विद्यार्थियों की शिक्षा बीच में ही रुक गई है। इन हालात को देखते हुए Akhil Iyer ने संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जाए और राहत कार्यों से जुड़े लोगों को बिना किसी रुकावट के सुरक्षित तरीके से काम करने दिया जाए ताकि जरूरतमंदों तक समय पर मदद पहुंच सके।