यमन ने लेबनान से की अपील, हूती विद्रोहियों को हिजबुल्लाह की मदद रोकने को कहा
यमन ने लेबनान सरकार से हिजबुल्लाह द्वारा हूती मिलिशिया को दी जा रही सैन्य मदद रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।

सना (यमन): यमन ने लेबनान सरकार से हिजबुल्लाह द्वारा हूती मिलिशिया को दी जा रही सैन्य सहायता को रोकने के लिए समन्वित और निर्णायक कदम उठाने की अपील की है। यमन ने इस बात पर जोर दिया है कि लेबनान के अपने क्षेत्र और हथियारों पर उसके संप्रभु अधिकार का वह पूरा समर्थन करता है।
यमन की विदेश मंत्री अफ़राह अल-ज़ौबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लेबनान के उस आधिकारिक रुख का स्वागत किया, जिसमें यमन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया है। उन्होंने कहा कि हूती लड़ाकों को ईरान समर्थित लेबनानी समूह से मिल रही लॉजिस्टिक और परिचालन सहायता को खत्म करने के लिए अब दोनों देशों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।
अल-ज़ौबा ने कहा, "हम यमन की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन और आंतरिक मामलों में किसी भी सैन्य हस्तक्षेप को खारिज करने के लिए नेतृत्व और सरकारी स्तर पर हमारे भाई लेबनान के रुख की बहुत सराहना करते हैं।" उन्होंने दोनों देशों की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच संस्थागत फॉलो-अप की मांग करते हुए सीमा पार मिलिटेंट नेटवर्क को रोकने के लिए संयुक्त कार्रवाई का आग्रह किया।
विदेश मंत्री ने आगे बताया कि हूती मिलिशिया के सैन्य अभियानों में हिजबुल्लाह सदस्यों की भूमिका के बारे में उनकी सरकार द्वारा की गई घोषणा पर संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय होना चाहिए। उन्होंने इस सहायता को रोकने और इसे दोबारा होने से बचाने के लिए संयुक्त उपाय करने की बात कही।
यमन ने लेबनान की संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। अल-ज़ौबा के मुताबिक, यमन लेबनानी राज्य के उन प्रयासों का समर्थन करता है जिसके तहत वह अपने पूरे क्षेत्र पर अपना अधिकार बढ़ाना चाहता है और हथियारों तथा युद्ध एवं शांति के फैसलों पर विशेष नियंत्रण रखना चाहता है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने कई बार हिजबुल्लाह और उसके ईरानी समर्थकों पर हूती बलों को बैलिस्टिक मिसाइल विशेषज्ञता, कॉम्बैट ड्रोन प्रशिक्षण और परिचालन नेतृत्व प्रदान करने का आरोप लगाया है।
यह बयान लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम की बैठक के बाद आया है, जिसमें घरेलू और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई थी। प्रधानमंत्री सलाम ने एक सार्वजनिक घोषणा में लेबनान को बाहरी सैन्य संघर्षों में घसीटने के खिलाफ चेतावनी दी थी।
प्रधानमंत्री सलाम ने कहा कि युद्ध और शांति के फैसले विशेष रूप से राज्य और उसके संवैधानिक संस्थानों के हाथ में होने चाहिए। उन्होंने विदेशी हितों की सेवा में लेबनान को किसी नए और निरर्थक साहसिक कार्य में धकेलने के परिणामों के प्रति आगाह किया।
सलाम ने उन लेबनानी सशस्त्र तत्वों की निंदा की जिन्होंने बाहरी सैन्य अभियान चलाए हैं, और इस दौरान उन्होंने यमन सरकार द्वारा किए गए हालिया खुलासों का विशेष रूप से उल्लेख किया।