यमन में बड़ा स्वास्थ्य संकट, पांच मिलियन बच्चों को जरूरी टीके नहीं मिलने से मंडराया खतरा

Aanya7 September 20264 min read36 viewsYemen
यमन में बड़ा स्वास्थ्य संकट, पांच मिलियन बच्चों को जरूरी टीके नहीं मिलने से मंडराया खतरा

यमन देश में इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है जिसके कारण लगभग पांच मिलियन बच्चों को जरूरी और नियमित टीकाकरण नहीं मिल पा रहा है। राजनीतिक विवादों और प्रशासनिक रुकावटों के बढ़ने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है, जिससे आम परिवारों की मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। यमन के एक स्थानीय नागरिक मिरसाल आदेल ने बताया कि उनके बच्चों की सेहत उनके लिए सबसे ऊपर है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्हें अपने बच्चे के लिए टीके लगवाने के लिए सरकारी नियंत्रण वाले शहर ताइज तक करीब 75 किलोमीटर की लंबी यात्रा करनी पड़ी। इस पूरी यात्रा में उन्हें लगभग 100 अमेरिकी डॉलर का खर्च उठाना पड़ा, जो इस गरीब परिवार के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ साबित हुआ है। कुछ साल पहले तक घर-घर जाकर टीकाकरण करने का अभियान आम बात हुआ करती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं और लोगों को अपने बच्चों की जान बचाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और स्थानीय प्रशासन में टकराव

यह पूरा संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन के टूटने और स्थानीय शासन प्रणालियों के बीच तालमेल की कमी के कारण पैदा हुआ है। साना की राजधानी पर नियंत्रण रखने वाले हुथी प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें अपनी आखिरी वैक्सीन की खेप पिछले साल 4 सितंबर 2025 को मिली थी। अनीस अल-असबाही ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNICEF पर मानवीय सहायता का राजनीतिकरण करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि साना में यूनीफिस ने अपने कामकाज को पूरी तरह से निलंबित कर दिया है और जरूरी मेडिकल सप्लाई रोक दी है। इसके अलावा, उन्होंने एडेन स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय पर यह भी आरोप लगाया कि परिवहन के दौरान टीकों के खराब होने की संभावनाओं को लेकर उनके साथ कोई सही समन्वय नहीं किया गया। वहीं दूसरी तरफ, एडेन में बैठी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस साल जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत 2026 में हुथी ताकतों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि हुथी बल वैक्सीन की डिलीवरी में लगातार रुकावटें पैदा कर रहे हैं, मेडिकल टीमों के आने-जाने पर रोक लगा रहे हैं और वितरण के रास्तों में दखलंदाजी कर रहे हैं।

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टीकों का स्टॉक खत्म और युद्ध अपराध की चेतावनी

हुथी द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगस्त 2026 में यह बात साफ कर दी थी कि बच्चों को लगने वाले सभी नौ जरूरी टीके पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि साल 2025 के अंत में UNICEF और Gavi द्वारा सप्लाई रोके जाने के बाद से यह स्थिति बनी है। इस खतरनाक स्वास्थ्य आपातकाल के लिए उन्होंने सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन, संयुक्त राष्ट्र और अन्य संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच, अमेरिकन सेंटर फॉर जस्टिस (ACJ) ने जुलाई 2026 में एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि चिकित्सा आपूर्ति में जानबूझकर डाली जा रही बाधाएं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं। इस बारे में अधिक जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की WHO Yemen Immunization Page पर भी देखी जा सकती है, जहां टीकाकरण से जुड़ी प्राथमिकताओं को साझा किया गया है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा और खसरे का प्रकोप

बच्चों को टीके न मिलने का असर अब सीधे तौर पर सरकारी स्वास्थ्य आंकड़ों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मारिब के स्थानीय प्रशासन ने अगस्त 2026 की शुरुआत में खसरे की बीमारी को लेकर आपातकाल की घोषणा कर दी थी। अधिकारियों ने बताया कि साल की शुरुआत से लेकर अब तक इस बीमारी से 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कुल 1,624 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इससे पहले अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच यमन में खसरे के कुल 11,354 मामले दर्ज किए गए थे, जो पूरी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि, इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के सहयोग से चलाए गए आपातकालीन अभियानों के जरिए मारिब में 13,700 से अधिक बच्चों तक मदद पहुंचाई गई है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के ढह जाने, गलत जानकारियों के फैलने और पैसों की भारी कमी के कारण आज भी देश की बहुसंख्यक आबादी खतरे के साए में जी रही है। इस पूरी स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट ReliefWeb Yemen Report पर भी उपलब्ध कराई गई है।

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