Yemen में भड़का संघर्ष, अल-बयदा में यमनी एयर फोर्स ने हाउती ठिकानों पर की एयरस्ट्राइक

यमन में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है जहां यमनी मिलिट्री एविएशन ने अल-बयदा गवर्नरट के मुकायरास जिले में हाउती नियंत्रण वाले ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। यह सैन्य कार्रवाई 12 सितंबर 2026 को हुई, जब अधिकारियों ने बताया कि अदन के पूर्व में एक अमेरिकी कमर्शियल पोत पर हुए मिसाइल हमले के पीछे इसी इलाके का हाथ था। इस घटना से ठीक पहले राडा क्षेत्र से ड्रोन हमले भी किए गए थे, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। आम जनता और वहां रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि लगातार बढ़ते हमलों की वजह से सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ रहा है।
अल-धले और अल-बयदा में सैन्य अभियान तेज
अल-बयदा ऑपरेशन के अलावा यमनी सरकार की नेशंस शील्ड फोर्सेस ने दक्षिण-पश्चिम अल-धले प्रांत में भी हाउती ठिकानों पर अलग से सटीक एयरस्ट्राइक करने की पुष्टि की है। यह सभी सैन्य गतिविधियां ऐसे समय में हो रही हैं जब पूरे क्षेत्र में भारी अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को यमनी सशस्त्र बलों ने अल-बयदा में एक बड़ा आक्रामक अभियान शुरू किया था जिसमें एज-जाहिर मोर्चे पर कई ठिकानों को आजाद कराने का दावा किया गया और हाउती रैंकों में तेजी से हो रही गिरावट को नोट किया गया। इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय निवासियों की मुसीबतें काफी बढ़ गई हैं और लोग हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
दूसरी तरफ हाउती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारिया ने अदन की खाड़ी और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की संपत्तियों के खिलाफ सफल सैन्य अभियानों की घोषणा की और एक अमेरिकी युद्धपोत पर सीधे हमले का दावा किया। इसके अलावा हाउती बलों ने पश्चिमी अल-हुदायदा प्रांत के पूरे हिस्से और तटीय शहर मोखा पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिससे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के लिए सीधा खतरा पैदा हो गया है। 12 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र के यमन दूत हान्स ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद को जानकारी दी कि यह संघर्ष एक खतरनाक नए चरण में प्रवेश कर चुका है और उन्होंने नागरिक जीवन तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। इसी बीच सऊदी अरब ने भी 12 सितंबर 2026 को अपने ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को एहतियातन बंद करने की घोषणा कर दी, जो इराक से संचालित होने वाली ताकतों द्वारा किए गए कई ड्रोन हमलों के बाद उठाया गया कदम था।