यमन सरकार का बड़ा हमला, धूबाब और मोचा में हवाई कार्रवाई से हूती लड़ाके तबाह.

यमन की सरकारी वायुसेना ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को एक बड़े सैन्य अभियान के तहत धूबाब और मोचा क्षेत्रों में हूती मिलिशिया के ठिकानों, हथियारों और वाहनों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। यह सैन्य कार्रवाई हाल ही में हूती बलों द्वारा किए गए कब्जों का कड़ा जवाब थी, जिन्होंने पिछले दिनों मोचा के रणनीतिक बंदरगाह और पेरिम द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इस तीखी झड़प और सैन्य अभियानों के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा संकट पैदा हो गया है, जिसे देखते हुए सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
सैन्य प्रवक्ता ने दी जानकारी और जारी की चेतावनी
यमन की सरकारी सेना के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल माजेद अब्दुल्ला अल-नाजिली ने सबा न्यूज़ एजेंसी के माध्यम से इस सफल सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में हूती समूह के कई लड़ाके मारे गए और उनके सैन्य साजो-सामान को भारी नुकसान पहुंचाया गया। सरकार इस हूती समूह को ईरान समर्थित एक आतंकवादी संगठन मानती है। बढ़ते खतरे को देखते हुए अल-नाजिली ने आम नागरिकों के लिए एक जरूरी सलाह जारी की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे मौजूदा युद्ध गतिविधियों के कारण ताइज-मोचा और मोचा-धूबाब वाले रास्तों पर जाने से पूरी तरह बचें। सरकार ने पश्चिमी ताइज और मोचा के आसपास के इलाकों को पहले ही आधिकारिक तौर पर मिलिट्री जोन घोषित कर चुका है।
जुलाई से चल रहा है संघर्ष और बड़ा विस्थापन
यमन में यह हिंसा का दौर और क्षेत्र में तनाव जुलाई के शुरुआती दिनों से लगातार काफी तेज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की माइग्रेशन एजेंसी ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि हूती गुट के इन ताजा हमलों की वजह से अब तक 500 से ज्यादा लोग हताहत हुए हैं। इसके अलावा करीब 46,000 आम लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा है। इस संघर्ष के कारण मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
रणनीतिक महत्व और अंतरराष्ट्रीय कड़ियां
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य समुद्री व्यापार और तेल निर्यात के लिए दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर नियंत्रण को लेकर रणनीतिक चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने जानकारी दी कि मोचा के पतन के समय सऊदी अरब ने अपनी वायुसेना के जरिए कोई सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया। बताया गया कि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन को अमेरिका की तरफ से इस बड़े सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी नहीं मिली थी, हालांकि अमेरिका लगातार इस गठबंधन को जरूरी सैन्य सलाहकार और खुफिया सहायता प्रदान कर रहा है।