यमन के अल-अलिमी ने सऊदी अरब के समर्थन की सराहना की, सैन्य अभियानों का ऐलान

यमन संकट के बीच एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य मोड़ सामने आया है। यमनी राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने हाल ही में अपने संबोधन में सऊदी अरब की भूमिका की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यमन के सबसे मुश्किल दौर में सऊदी अरब ने जिस तरह से साथ निभाया है, उसे यमन की जनता कभी नहीं भूलेगी।
सऊदी अरब के प्रति आभार और द्विपक्षीय संबंध
अपने संबोधन में अल-अलिमी ने बताया कि कैसे सऊदी अरब ने यमनी राज्य संस्थानों को मजबूत करने में मदद की है। इसके साथ ही, उन्होंने मानवीय सहायता प्रदान करने और लाखों यमनी शरणार्थियों को अपने यहां आश्रय देने के लिए भी सऊदी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यमन की सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति के भविष्य को तय करने में सऊदी अरब एक अहम साझीदार बना रहेगा।
मुक्ति अभियानों की नई शुरुआत
सऊदी समर्थन की सराहना करने के साथ-साथ अल-अलिमी ने एक नए सैन्य चरण की शुरुआत का भी ऐलान किया है। सभी तरह के शांति प्रयासों और बातचीत के रास्ते खत्म होने के बाद, अब यमन ने 'तैयारी से मुक्ति' की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। बची हुई टेरिटरी को वापस पाने और देश में पूरी तरह से राजकीय सत्ता बहाल करने के लिए सैन्य अभियानों का आगाज कर दिया गया है।
राज्य की बहाली और पुनर्निर्माण का संकल्प
अल-अलिमी ने साफ किया कि यह सैन्य अभियान किसी खास शहर, कबीले या धार्मिक गुट के खिलाफ नहीं है। इसे 'राज्य की लड़ाई' करार देते हुए उन्होंने कहा कि इसका मकसद सिर्फ सरकारी संस्थाओं को दोबारा खड़ा करना है। साथ ही, सुरक्षा बलों को हुथी मिलिशिया के सफाए के लिए रणनीतिक योजनाओं पर सख्ती से अमल करने का निर्देश दिया गया है।
- राज्य के कर्मचारियों के वेतन भुगतान को प्राथमिकता देना
- सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का पुनरुद्धार
- मुक्त कराए गए क्षेत्रों में सरकारी संस्थाओं की वापसी
- दक्षिण से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए सऊदी प्रायोजित दक्षिण-दक्षिण संवाद जारी रखना
इस नई घोषणा के बाद यमन के राजनीतिक और सुरक्षा समीकरणों में हलचल तेज हो गई है, और आने वाले दिनों में स्थिति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।