Yemen Crisis: यमन के अल-बरह में हouthi लीडर्स की मीटिंग पर फौजी हमला, अल-अधारी गिरफ्तार.

यमन के फौजी बलों ने देश में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। 9 सितंबर 2026 को यमन की सेना ने अल-बरह इलाके में हूती विद्रोहियों की एक गुप्त मीटिंग पर जोरदार सैन्य हमला किया। पश्चिमी तािज़ फ्रंट पर पिछले कुछ दिनों से हालात काफी ज्यादा खराब चल रहे हैं, जहां सरकारी फौज और हूती लड़ाकों के बीच लगातार भारी गोलीबारी और संघर्ष देखने को मिल रहा है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य विद्रोहियों की ताकत को कमजोर करना था, जो लगातार इस इलाके में अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहे थे।
तािज़ फ्रंट पर बढ़ी हिंसा और सैन्य कार्रवाई
सैन्य मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे दिन युद्धक विमानों ने अल-काधा और अल-बरह के इलाकों में हूती मिलिशिया के नए दस्तों और हथियारों की खेप को भी निशाना बनाया। आसमान से हुई इस बमबारी ने विद्रोहियों के ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इसी तारीख को, सरकार समर्थक नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान हूती कमांडर अबू अली अल-अधारी को अल-बरह फ्रंट से जिंदा गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। यह गिरफ्तारी सरकारी सेना के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, क्योंकि यह कमांडर पिछले कई मामलों में सक्रिय रूप से शामिल था।
इससे पहले 8 सितंबर 2026 को भी दोनों पक्षों के बीच भयंकर लड़ाई हुई थी। इस दौरान अत्याधुनिक ड्रोनों, भारी तोपखाने और अन्य खतरनाक हथियारों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया था। हूती ठिकानों पर लगातार हो रहे इन हमलों से विचलित होकर, हूती मीडिया ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे मारिब, अल-जोफ, तािज़ और होदेइदाह में कुल 32 हवाई हमले किए गए। इसके साथ ही, यमन की सेना के विमानों ने मक्बानह में हूती ठिकानों पर भी कई बम गिराए, जिससे उन्हें भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा।
सऊदी अरब और अमेरिका का कड़ा रुख
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आनी शुरू हो गई हैं। सऊदी अरब के मंत्रिमंडल ने हूती विद्रोहियों की इन تمام हरकतों को पापपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना आक्रामकता करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने एक बार फिर दोहराया कि उनका देश अपनी सीमाओं की रक्षा करने और अपनी संप्रभुता बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सऊदी सरकार किसी भी बाहरी खतरे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
दूसरी ओर, 9 सितंबर को यमन में स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में साफ तौर पर कहा गया कि देश में चल रहे मौजूदा संघर्ष और मानवीय संकट के लिए मुख्य रूप से हूती विद्रोही ही जिम्मेदार हैं। अमेरिका का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन के अंदरूनी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और आम नागरिकों को इस हिंसा की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। स्थानीय लोग इस लगातार जारी खूनी संघर्ष से काफी ज्यादा परेशान हो चुके हैं और शांति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।