यमन में बड़ा सैन्य अभियान, अल-बायदा में हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले, सऊदी और अमेरिका का मिल रहा है साथ.

यमीनी सशस्त्र बलों ने देश के मध्य क्षेत्र में स्थित अल-बायदा गवर्नरट के धी नईम जिले में छिपे हुए हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर भारी एयरस्ट्राइक की है। यह सैन्य कार्रवाई 7 सितंबर 2026 को सरकारी सेना द्वारा शुरू किए गए एक बड़े व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस पूरे इलाके को हूती नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त कराना है। इस हफ्ते पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में काफी तेजी आई है, जिससे स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष काफी बढ़ गया है।
अल-बायदा में तेज हुई सैन्य कार्रवाई
7 सितंबर को सरकारी सेना ने हूती ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल तेरह हवाई हमले किए थे। इन हमलों में अल-शर्या, धी नईम और अल-सावादियाह में बने हूती कमांड सेंटर और मिसाइल लॉन्च पैड को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। यमीनी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल माजेद अल-नेजिली ने मीडिया को बताया कि सरकारी सैनिकों ने अभियान की शुरुआत में ही धी नईम के बाहरी इलाकों तक अपनी पहुंच बना ली थी। इसके बाद हूती विद्रोहियों ने सेना को पीछे धकेलने के लिए कई बार जवाबी हमले किए, जिन्हें सरकारी जवानों ने पूरी ताकत से नाकाम कर दिया और विद्रोहियों को भारी जान-माल का नुकसान पहुंचाया।
यमन में चल रहा यह संघर्ष इस साल की शुरुआत यानी जुलाई की शुरुआत से ही काफी तेज हो गया है, जबकि उससे पहले कुछ समय के लिए हालात शांत थे। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। 10 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बोलते हुए सऊदी अरब के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अब्दुलअजीज अल-वासिल ने स्पष्ट किया कि उनका देश हूती आक्रामकता को रोकने और जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और खुफिया मदद
सरकारी फौजों और सऊदी गठबंधन के अभियानों को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद पहुंचाई जा रही है। 11 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका सऊदी बलों को खुफिया सहायता मुहैया करा रहा है। इस सहायता में युद्धक्षेत्र की निगरानी करना और सही ठिकानों की पहचान करने में मदद करना शामिल है, ताकि हूती समूह के खिलाफ चल रहे इन ऑपरेशनों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। यमन की इस स्थिति पर खाड़ी देशों के साथ-साथ दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर सीधे तौर पर पड़ रहा है।