यमन में बड़ा सैन्य संघर्ष, तािज़ और हुदैदाह में सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ शुरू किया काउंटर-ऑफ़ेंसिव.

यमन की राजधानी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा हालात अचानक से काफी ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की सेना ने 5 सितंबर 2026 को तािज़ और हुदैदाह गवर्नरेट में बड़ी सैन्य सफलता हासिल करने की बात कही है। यह कदम तब उठाया गया जब हूती विद्रोहियों ने 3 सितंबर 2026 को लाल सागर के तटीय इलाकों पर 14 बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला बोल दिया था। इस हमले के बाद सरकारी सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी और कई रणनीतिक ठिकानों पर फिर से अपना कब्जा जमा लिया। आम जनता और स्थानीय लोगों के बीच इस ताज़ा सैन्य तनाव को लेकर भारी चिंता का माहौल बना हुआ है क्योंकि लगातार हो रही गोलीबारी और बमबारी से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
तािज़ और हुदैदाह में सैन्य कार्रवाई और ज़मीनी हालात
युद्ध के मैदान से मिल रही जानकारियों के अनुसार, तािज़ में सरकारी सैनिकों ने हयाफ़न फ्रंट पर स्थित सईद ताहा हिल और अल-वतरा हिल के अलावा जबल हबाशी जिले की अल-खजान हिल जैसे महत्वपूर्ण और ऊंचे इलाकों को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया है। वहीं दूसरी ओर, नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस और जाइंट्स ब्रिगेड यानी अल-अमालीका ने हुदैदाह के दक्षिणी अल-जराही फ्रंट पर हूती विद्रोहियों के खिलाफ जोरदार काउंटर-ऑफ़ेंसिव शुरू कर दिया है। ज़मीन पर चल रही इस लड़ाई को और ताकत देने के लिए यमनी एयर फोर्स ने 15 से ज्यादा हवाई हमले किए। इन एयर स्ट्राइक्स में सीधे तौर पर हूती ठिकानों, उनके जमावड़े वाले स्थानों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया ताकि उनकी ताकत को कमजोर किया जा सके।
नौसेना की कार्रवाई और तटीय इलाकों में सुरक्षा
सिर्फ ज़मीन और हवा ही नहीं, बल्कि समंदर में भी सेना और विद्रोहियों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली है। यमनी नौसेना की यूनिट्स ने हूती विद्रोहियों की दो विस्फोटक से भरी नावों को पूरी तरह तबाह कर दिया। ये नावें पश्चिमी तट पर स्थित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले अल-मोखा पोर्ट के पास अल-फजरा क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश कर रही थीं। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी नौसेना ने हानिश और जुकर द्वीपों के पास हूती गुट की चार अन्य विस्फोटक नौ नावों को बीच रास्ते में ही रोककर नष्ट कर दिया था। सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि वे देश के तटीय इलाकों और बेहद संवेदनशील बाब अल-मंदाब स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और किसी भी घुसपैठ को कामयाब नहीं होने देंगे।
मानवीय संकट और विस्थापन की गंभीर स्थिति
इस भीषण सैन्य संघर्ष की वजह से आम नागरिकों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पिछले 48 घंटों के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 120 लोगों के हताहत होने की खबर सामने आई है, जबकि गुरुवार से अब तक कुल मरने वालों का आंकड़ा 80 से ज्यादा पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, पिछले दो दिनों के भीतर अकेले तािज़ प्रांत के अंदर लगभग 1,790 परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। इन विस्थापित परिवारों में लगभग 12,000 लोग शामिल हैं जिनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में हैं। लगातार बिगड़ते हालात के कारण राहत एजेंसियों के सामने इन बेघर हुए लोगों तक जरूरी मदद और रसद पहुंचाने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।