यमीनी सेना का हूती ठिकानों पर भीषण हमला, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में सुलग रही तनाव की आग एक बार फिर भड़क उठी है। यमन की राजधानी सना में यमीनी सेना ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर जोरदार और भीषण बमबारी शुरू कर दी है। इस आक्रामक सैन्य अभियान के बाद पूरे क्षेत्रीय माहौल में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसके तार सीधे तौर पर ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
क्षेत्रीय अस्थिरता और ईरान की प्रतिक्रिया
यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और उसके प्रॉक्सी समूहों की गतिविधियों के कारण मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यमन, इराक और लेबनान में अपने समर्थक मिलिशिया समूहों को किसी भी बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
तनाव का दायरा सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पड़ोसी देशों में भी साफ देखा जा रहा है। हाल ही में सऊदी अरब के अहाद रफ़ीदा क्षेत्र में एक इंटरसेप्टेड हूती बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे से एक स्थानीय नागरिक के घायल होने की खबर आई है, जो इस संघर्ष की विभीषिका को बयां करता है।
अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और कूटनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेना अपनी रणनीतिक मौजूदगी को बढ़ाते हुए विमान वाहक पोतों और अतिरिक्त सैन्य बलों को तैनात करने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, कूटनीतिक मोर्चे पर भी सरगर्मी तेज है और कैंप डेविड में उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठकों के जरिए सऊदी अरब तथा हूती संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया जा रहा है।
इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक प्रतिबंधों का दौर भी जारी है, जिससे ईरान और पश्चिमी देशों के बीच दूरियां और गहरी होती जा रही हैं। यमन में चल रही इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में शांति बहाली की राह बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है।