यमन के ताएज में भीषण संघर्ष, 55 हूती मिलिशिया ढेर

यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ताएज प्रांत में हिंसा की आग एक बार फिर भड़क उठी है। पिछले 24 घंटों के दौरान हुए भीषण संघर्ष और सैन्य अभियानों में 55 हूती मिलिशिया के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इस ताज़ा वृद्धि ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है, जहां सरकारी सेनाएं हूती आंदोलन के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई कर रही हैं।
यमन सशस्त्र बलों के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल नुज़ैली के अनुसार, सरकारी लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को कई सटीक हवाई हमले किए। इन हमलों में हूती विद्रोहियों के सैन्य साजो-सामान, मिसाइल डिपो, और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती बलों ने अल-अहतोउब, अल-तुवैइर और जबल घाबारी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में घुसपैठ की कोशिश की थी, और अदन को ताएज से जोड़ने वाले एक पुल को भी उड़ा दिया था ताकि सैन्य परिवहन को रोका जा सके।
हूती आक्रामकता और हवाई सुरक्षा का मुकाबला
संघर्ष अब 56 से अधिक फ्लैशपॉइंट्स तक फैल चुका है, जिसे सैन्य अधिकारियों ने एक बड़े आक्रमण के रूप में वर्णित किया है। ज़मीनी जंग के साथ-साथ, यमनी सेना ने कई मोर्चों पर दुश्मन के मंसूबों को नाकाम कर दिया है। सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने आ रहे कई ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा, अदन में वायु रक्षा प्रणालियों ने भी हूती आत्मघाती ड्रोनों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया।
गंभीर मानवीय चिंताएं
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने बढ़ते सैन्य अभियानों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इन झड़पों से आम नागरिकों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर, यमन के मानव अधिकार मंत्रालय ने हूती मिलिशिया द्वारा बाल सैनिकों की भर्ती पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है और बताया कि अकेले सितंबर महीने में कम से कम 100 बच्चों की मौत हुई है।
यमन सरकार ने ताएज के मुख्य परिवहन मार्गों को प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया है, जबकि लगातार जारी इन हमलों की वजह से हजारों आम नागरिक अपने घरों से विस्थापित होने को मजबूर हैं और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।