Yemen में भड़की हिंसा, Taiz के पास अल-हौबान कैंप में हूती विद्रोहियों पर यमनी सेना का बड़ा हमला.

यमन में चल रहे संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ यमन की विमानन सेना ने ताएज के पूर्व में स्थित अल-हौबान के नए सैन्य शिविर में हूती विद्रोहियों की नई सैन्य टुकड़ियों को निशाना बनाया और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। 27 सितंबर 2026 को सामने आई इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई इस क्षेत्र में हाल ही में तेज हुई हिंसक झड़पों का हिस्सा है, जो अप्रैल 2022 में हुए संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्ष विराम के बाद से अब तक की सबसे भयानक लड़ाई मानी जा रही है। आम लोगों की जिंदगी पर इसका गहरा असर पड़ रहा है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।
ताएज प्रांत में ताबड़तोड़ हवाई हमले
सरकारी युद्धक विमानों ने 26 सितंबर 2026 को यमन के दक्षिण-पश्चिमी ताएज प्रांत में कई हवाई हमले किए, जिसकी पुष्टि यमनी सशस्त्र बलों ने की थी। इन हमलों का मुख्य निशाना हूती विद्रोहियों की रसद सप्लाई लाइनें, हथियारों के गोदाम और सैनिकों के ठिकाने थे। ताएज शहर के उत्तर में अल-सितीन स्ट्रीट पर हथियारों से भरे एक काफिले को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, अल-वाज़ियाह जिले में हूती विद्रोहियों की मदद के लिए आई टुकड़ियों और मावियाह क्षेत्र में बने हथियारों के गुप्त ठिकानों पर भी सटीक बमबारी की गई। सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों में कई गाड़ियों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया और दर्जनों हूती लड़ाके मारे गए, जिनमें कुछ बड़े फील्ड कमांडर भी शामिल थे।
गठबंधन सेना और हूती प्रवक्ता के दावे
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेआ ने इस बात की पुष्टि की कि सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के युद्धक विमानों ने 26 सितंबर को खत्म हुए 24 घंटों के दौरान यमन के छह अलग-अलग प्रांतों में कुल 27 हवाई हमले किए। हालांकि अल-हौबान कैंप में हुई कार्रवाई के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन जमीनी रिपोर्ट बताती हैं कि यह इलाका लंबे समय से सैन्य गतिविधियों का केंद्र रहा है। इससे पहले 17 सितंबर 2026 को भी इसी क्षेत्र में हूती संचार केंद्र को निशाना बनाया गया था। लगातार हो रहे इन हमलों से पूरे इलाके में खौफ का माहौल है।
लाखों लोग हुए विस्थापित
सितंबर की शुरुआत में हूती विद्रोहियों द्वारा रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में मय्यून द्वीप पर कब्जा करने के बाद से यह सैन्य तनाव और अधिक बढ़ गया है। जुलाई की शुरुआत से सुलग रही यह हिंसा अब विकराल रूप ले चुकी है। इस बढ़ती तबाही और लगातार हो रहे हमलों के कारण सितंबर महीने की शुरुआत से लेकर अब तक कम से कम 125,000 लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हो चुके हैं। आम नागरिकों को इस संघर्ष में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।