यमन की सरकारी सेना ने मारीब के उत्तर में स्थित अल मजजर जिले में प्रवेश कर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है

मारीब: यमन की सरकारी सेना ने एक बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए मारीब के उत्तर में स्थित अल मजजर जिले में प्रवेश कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब यमन के अलग-अलग प्रांतों में संघर्ष और तेज हो गया है।
16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी सेना हूती विद्रोहियों के ऑपरेशनों का मुकाबला कर रही है। इस बीच ताइज़ में लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि आम लोगों के लिए जरूरी सेवाओं और मानवीय सहायता तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
ताइज़ के माउंट हान के पास हुई झड़पों में हूती कमांडर अब्दुलरहमन मोहम्मद सुफियान वजीह अल-दीन, जिसे अबू अल-करर के नाम से भी जाना जाता था, मारा गया है। इसके अलावा सरकारी सेना ने ताइज़ शहर के दक्षिण में अल-मिसराख जिले के धि अल-बारीह और जबा इलाकों में हवाई हमले किए हैं।
इस युद्ध का असर आम जनता पर भारी पड़ रहा है। सिर्फ ताइज़ प्रांत में सितंबर की शुरुआत से अब तक 1,14,708 लोग विस्थापित हो चुके हैं। यमन की विदेश मंत्री अफरह अल-ज़ौबा ने संयुक्त राष्ट्र से हूती घेराबंदी को रोकने के लिए हस्तक्षेप की अपील की है और चेतावनी दी है कि अगर कदम नहीं उठाए गए तो मानवीय आपदा आ सकती है।
पूर्व प्रधानमंत्री माईन अब्दुलमालिक सईद ने इन मोर्चों की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्य इलाके हाथ से निकल गए तो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और अदन जाने वाले रास्ते पर नियंत्रण को खतरा हो सकता है।
दूसरी तरफ सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि हूती सेना उन्नत ड्रोन और मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने खमीस मुशैत, मदीना क्षेत्र और पूर्वी प्रांत के पास ऐसे खतरों को रोकने की बात कही है।
तनाव के बीच अदन के अल-माशिक पैलेस पर हूतियों ने एक घातक हमला किया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए।