यमन की सरकारी सेना ने मारिब के अल-मजजर जिले पर किया कब्जा और हूती लड़ाकों को खदेड़ा

मारिब (यमन): यमन की सरकारी सेना और स्थानीय प्रतिरोध इकाइयों ने उत्तरी मारिब प्रांत के अल-मजजर जिले में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। 16 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी के अनुसार, यह कामयाबी हूती लड़ाकों के इस इलाके से पीछे हटने के बाद मिली है।
यमन के अलजौमहुरिया टीवी के मुताबिक, सरकारी सेना अब इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चला रही है। सेना के जवान गांवों, पहाड़ियों और ऊंचाई वाले स्थानों को सुरक्षित कर रहे हैं। साथ ही, पीछे हटते हुए विद्रोहियों द्वारा बिछाए गए लैंडमाइन नेटवर्क को हटाने का काम भी किया जा रहा है।
इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य रणनीतिक उद्देश्य मारिब को पड़ोसी प्रांतों से जोड़ने वाले मुख्य आपूर्ति मार्गों को सुरक्षित करना है। यह ऑपरेशन 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य हूती समूह के कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को वापस पाना है।
सरकारी सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने बताया कि 16 अक्टूबर से पिछले 24 घंटों के भीतर लड़ाकू विमानों, ड्रोन, आर्टिलरी और रॉकेट लॉन्चरों के जरिए 1,250 हमले किए गए। इन हमलों में हूतियों के 150 वाहनों को तबाह कर दिया गया। इस दौरान सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी मजजर और रहबा जिलों में हवाई हमले कर समर्थन दिया।
दूसरी ओर, मारिब प्रांत के मीडिया कार्यालय ने बताया कि 15 अक्टूबर की शाम को हूती बलों ने मारिब शहर पर नौ बैलिस्टिक मिसाइलें और सात अन्य प्रोजेक्टाइल दागे। कार्यालय ने इन हमलों की अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए निंदा की है।
लड़ाई केवल मारिब तक सीमित नहीं है। यमनी सेना ने बताया कि 16 अक्टूबर को ताइज़ के दक्षिण में अल शकब फ्रंट पर हुई झड़पों में 16 हूती लड़ाके मारे गए और कई घायल हुए। इसी दिन ताइज़ के दक्षिण में हूती ठिकानों पर और हवाई हमले भी किए गए।
इससे पहले 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी ने कहा था कि यह सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि पूरा देश आजाद नहीं हो जाता। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने नागरिक हताहतों पर चिंता जताते हुए और मानवीय सहायता की जरूरत को देखते हुए तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है।