सना में सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में यमन के सना में रणनीतिक और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े हमले किए गए हैं। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं और कूटनीतिक प्रयास भी लगभग ठप पड़ते नजर आ रहे हैं।
सैन्य अभियानों और जवाबी तैयारियों का दौर
सैन्य सूत्रों के अनुसार, इन रणनीतिक हमलों ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को एक नया मोड़ दे दिया है। दूसरी ओर, क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान के नेतृत्व और रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि यदि कोई नया संघर्ष शुरू होता है, तो उसका पैमाना पिछले ऑपरेशनों से भी बड़ा हो सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि लेबनान, यमन और इराक में उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को किसी भी समन्वित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अमेरिका और सहयोगियों की उच्चस्तरीय बैठकें
इस बीच, अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष अधिकारियों ने कैंप डेविड में एक अहम बैठक की, जिसमें ईरान के साथ चल रहे तनाव और सऊदी-हूथी संघर्ष पर गंभीरता से विचार किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है और आने वाले हफ्तों में विमानवाहक पोतों तथा हजारों सैनिकों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है।
जमीनी हालात और मलबे से नुकसान
क्षेत्रीय संघर्ष का असर आम नागरिकों और स्थानीय इलाकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अहद रफ़ीदा क्षेत्र में एक नागरिक हूथी बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से घायल हो गया।
कूटनीतिक स्तर पर हालात और बिगड़ गए हैं क्योंकि अमेरिका ने सख्त कदम उठाते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है और ईरान के वाहन तथा रेल सेक्टर पर नए प्रतिबंध भी लागू कर दिए गए हैं। इन तमाम घटनाओं के चलते आने वाले दिनों में मध्य पूर्व का राजनीतिक और सैन्य भविष्य बेहद अनिश्चित प्रतीत हो रहा है।