यमन की सरकारी सेना ने डॉन ऑफ यमन अभियान के तहत 24 घंटे में 200 हूती लड़ाकों को मार गिराया

Nura Basta21 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन की सरकारी सेना ने डॉन ऑफ यमन अभियान के तहत 24 घंटे में 200 हूती लड़ाकों को मार गिराया

यमन: यमन की सरकारी सेना ने अपने सैन्य अभियान 'डॉन ऑफ यमन' के दौरान बड़ी कामयाबी हासिल की है। सेना ने बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर चलाए गए ऑपरेशनों में 200 हूती विद्रोहियों को ढेर कर दिया गया है।

यमन सशस्त्र बलों के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली के मुताबिक, यह कार्रवाई 744 सटीक टारगेट ऑपरेशनों का हिस्सा थी। इन हमलों के लिए लड़ाकू विमानों, ड्रोन, फील्ड आर्टिलरी, रॉकेट लॉन्चर और स्नाइपर यूनिट्स का इस्तेमाल किया गया। सेना ने हूतियों के कमांड सेंटरों, मजबूत किलों और उनकी मदद के लिए आ रहे अतिरिक्त लड़ाकों को निशाना बनाया।

5 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ यह 'डॉन ऑफ यमन' अभियान अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। इस पूरे अभियान की देखरेख राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद कर रही है, जिसके अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी हैं। अल-अलीमी ने साफ किया है कि इस सैन्य कार्रवाई का मकसद सरकारी संस्थानों को फिर से बहाल करना, आम नागरिकों की सुरक्षा करना और हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस पाना है।

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ताइज़ और मारिब के इलाकों में भीषण लड़ाई जारी है, जबकि सरकार ने रणनीतिक रूप से बाब अल-मंडब पर दोबारा कब्जा कर लिया है। सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ सरकार हूतियों पर आर्थिक दबाव भी बना रही है। 19 अक्टूबर 2026 को अटॉर्नी जनरल के फैसले के बाद अदन स्थित सेंट्रल बैंक ने आतंकी सूची में शामिल 135 व्यक्तियों, संस्थाओं और एक समुद्री जहाज के खातों और संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।

राष्ट्रपति अल-अलीमी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सुरक्षा परिषद हूती आंदोलन को एक आतंकवादी संगठन घोषित करे और उन पर हथियारों की सख्त पाबंदी लगाए।

21 अक्टूबर 2026 तक सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं। ताइज़ में सरकारी सेना ने हूतियों द्वारा लगाई गई घेराबंदी तोड़ने की कोशिश में करीब 100 और लड़ाकों को मारने का दावा किया है। दूसरी तरफ, हूती बलों ने जवाबी हमले किए हैं और स्थानीय प्रतिरोध के सदस्यों का अपहरण किया है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में ढाई लाख लोगों के विस्थापन से मानवीय संकट गहरा गया है।

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