सऊदी गठबंधन के हवाई समर्थन से यमनी सेना ने तइज़ के पश्चिमी इलाके में हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा हमला शुरू किया

तइज़ (यमन): यमन की सरकारी सेना ने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई समर्थन से तइज़ के पश्चिमी सेक्टर में हूती मिलिशिया के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब इस क्षेत्र में भीषण लड़ाई जारी है और यह यमन के गृहयुद्ध का एक महत्वपूर्ण मोर्चा बन गया है।
इससे पहले 16 अक्टूबर को यमनी सेना की 22वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड ने तइज़ के दक्षिण में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए एक बड़े हमले को नाकाम करने की जानकारी दी थी। अल-शाकब मोर्चे के पूर्वी और पश्चिमी सेक्टरों में आठ घंटे तक चली भारी जंग के बाद सरकारी बलों ने दावा किया कि उन्होंने कम से कम 16 हूती लड़ाकों को मार गिराया है। सेना के मुताबिक, इस कार्रवाई से विद्रोहियों को कोई इलाका हासिल नहीं करने दिया गया।
तइज़ में हालात 12 अक्टूबर से काफी बिगड़ गए हैं, जब हूती बलों ने शहर को पूरी तरह घेर लिया। इस घेराबंदी की वजह से दक्षिण की ओर अदन जाने वाला मुख्य आपूर्ति मार्ग कट गया है। इस नाकेबंदी के कारण शहर में भोजन, ईंधन, साफ पानी और दवाओं की भारी किल्लत हो गई है, जिससे गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा बढ़ने की वजह से प्रांत के भीतर लगभग 80,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। यमनी राष्ट्रपति के सलाहकार और पूर्व प्रधानमंत्री माईन अब्दुलमलिक सईद ने इस संघर्ष के रणनीतिक खतरों पर बात की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तइज़ पर हूतियों का कब्जा होता है, तो यह विनाशकारी होगा। इससे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को खतरा होगा और अदन में स्थित सरकारी बेस का रास्ता अस्थिर हो जाएगा। सईद ने सरकारी समर्थित सैनिकों के बीच समन्वय की चुनौतियों और सैन्य तैयारियों की स्थिति का भी जिक्र किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार अपने 'डॉन ऑफ यमन' अभियान को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के साथ बातचीत की मांगों को ठुकरा रही है। दूसरी ओर, हूती मिलिशिया अपने अभियान में बैलिस्टिक मिसाइलों और अटैक ड्रोन जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है, जिसके निशाने पर क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे भी हैं।