यमन में फिर भड़की हिंसा, सरकारी सेना ने ताबूत अल-खजान पर किया कब्जा, हुती विद्रोहियों के साथ भीषण जंग.

यमन के ताइज़ प्रांत में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को यमन की सरकारी सेना ने पश्चिम ताइज़ के जबल हबाशी जिले में स्थित ताबूत अल-खजान (खजान हिल) पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण वापस पा लिया है। सरकारी मीडिया साबा टीवी की ओर से इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई है। यह सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में अचानक से बढ़ी हिंसा और संघर्ष के बाद सामने आई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.
ताइज़ और होदेदाह प्रांत में बड़ा हमला
क्षेत्र में हिंसा का यह ताजा दौर गुरुवार, 2 सितंबर 2026 को शुरू हुआ था। हुती विद्रोहियों ने ताइज़ और होदेदाह प्रांतों में एक बड़ा सैन्य हमला बोल दिया, जो साल 2022 में हुए संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम के बाद से अब तक की सबसे बड़ी झड़प मानी जा रही है। ताइज़ मिलिट्री एक्सिस के मीडिया सेंटर से मिली सैन्य रिपोर्ट के मुताबिक, माकबाना और अल-काधह इलाकों में दोनों पक्षों के बीच भयंकर लड़ाई लगातार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि हुती विद्रोहियों का मुख्य मकसद ताइज़ शहर को मोखा बंदरगाह से जोड़ने वाले मुख्य रास्ते को काटना और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य की तरफ आगे बढ़ना है.
संघर्ष में दर्जनों लोगों की मौत
गुरुवार से शुरू हुई इस खूनी झड़प में दोनों तरफ से भारी नुकसान की खबर सामने आई है। यमन की सेना के अनुसार, पश्चिमी ताइज़ मोर्चे पर लगभग 50 हुती मिलिशिया मारे गए या घायल हुए हैं। इस पूरे संघर्ष में अब तक कुल 81 लड़ाके अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें 24 सरकारी सैनिक और 57 हुती विद्रोही शामिल हैं। इसके अलावा, शुक्रवार को मोखा जंक्शन के पास एक रेस्टोरेंट पर हुती विद्रोहियों की एक बैलिस्टिक मिसाइल आ गिरी, जिसकी वजह से कई आम नागरिकों के हताहत होने की भी दुखद जानकारी सामने आई है.
सरकार ने उतारी भारी सैन्य ताकत
हुती विद्रोहियों की तरफ से लगातार किए जा रहे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों, जिनमें अल-वाज़ियाह पुल को भी निशाना बनाया गया, के जवाब में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार ने अपनी ताकत बढ़ा दी है। सरकार ने इलाके में नेशनल शIELD फोर्सेस और जाइंट्स ब्रिगेड के अतिरिक्त सैनिकों को तैनात कर दिया है। यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद मोहम्मद अल-अलिमी ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए साफ कहा है कि इन हमलों से वहां की सत्ता का संतुलन बिल्कुल नहीं बदलेगा। उन्होंने हुती नियंत्रित इलाकों के स्थानीय लोगों और जनजातियों से अपील की है कि वे अपने नौजवानों को इस बेकार की जंग में झोंकने से साफ इनकार कर दें.