यमन की सेना ने सैन्य विमानों की मदद से तइज़ में हूती विद्रोहियों के बड़े हमले को नाकाम किया

तइज़ (यमन): यमन की सेना ने सैन्य विमानों की मदद से तइज़ के कई मोर्चों पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए बड़े हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सरकारी बलों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जबल हान पहाड़ की ओर बढ़ रहे विद्रोहियों को पीछे धकेल दिया। यह इलाका अल-धबाब सड़क की निगरानी के लिए अहम है, जो तइज़ को लहज और अदन से जोड़ती है।
मोरल गाइडेंस विभाग के डिप्टी हेड कर्नल अब्दुल बासित अल-बहर ने बताया कि कई घंटों तक चली भीषण झड़पों के बाद सरकारी सेना ने हूतियों को पीछे खदेड़ दिया। उन्होंने जानकारी दी कि विद्रोहियों ने पश्चिमी मोर्चे और रिहायशी इलाकों में भारी गोलाबारी की थी।
अल-जुम्हूरिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान किए गए हवाई हमलों में जबल हबशी जिले के बनी बक्करी इलाके में हूतियों के संचार नेटवर्क टावरों को तबाह कर दिया गया। यह पूरी कार्रवाई सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान का हिस्सा है।
इस लड़ाई का असर आम जनता पर भी पड़ा है। मानवाधिकार मंत्रालय के तइज़ कार्यालय के मुताबिक, 11 अक्टूबर को ग्रामीण गांवों में हुई गोलाबारी में एक बच्चे समेत छह नागरिकों की मौत हो गई। वहीं, 15 अक्टूबर के जवाबी हमले से पहले के 24 घंटों में तइज़ शहर में 17 लोग घायल हुए और अल-सफवा अस्पताल के पास भी गोले गिरे।
यमन के प्रधानमंत्री शया अल-ज़िंदानी ने 14 अक्टूबर को नागरिकों पर हमलों और हूतियों द्वारा की गई घेराबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध अपराध' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को अंजाम भुगतना होगा।
विदेश मंत्री अफराह अल ज़ौबा ने संयुक्त राष्ट्र और मानवीय अधिकारियों को तइज़ की बिगड़ती स्थिति के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया है। वहां 40 लाख से ज्यादा लोग मानवीय आपदा का सामना कर रहे हैं।
मानवीय संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से अब तक इस प्रांत में 1,14,708 लोग विस्थापित हुए हैं, जो यमन में हाल के कुल विस्थापनों का 57 प्रतिशत है। करीब 6 लाख निवासी ईंधन, भोजन और दवाओं की कमी के कारण मदद पर निर्भर हैं।