यमन में बड़ा हमला नाकाम, सेना ने ताज़ और लाल सागर तट पर मार गिराए 18 से ज़्यादा हौथी विद्रोही.

यमीनी सरकारी सेना ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को ताज़ और लाल सागर के तटीय इलाकों में हौथी विद्रोहियों के बड़े पैमाने पर किए गए हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए माक़बानह पहाड़ों में बड़ा ऑपरेशन चलाया, जिसमें 18 से ज़्यादा हौथी लड़ाके मारे गए, घायल हुए या फिर सेना की गिरफ्त में आ गए। सरकारी टेलीविजन चैनल पर पकड़े गए हौथी कैदियों के वीडियो भी दिखाए गए हैं, जिससे यह साफ होता है कि सेना अपनी जमीन बचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। सैन्य अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि ताज़ सैन्य क्षेत्र में किसी भी सरकारी ठिकाने पर विद्रोहियों का कब्जा नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
हौथी विद्रोहियों ने दागी कई मिसाइलें और ड्रोन
यमीनी सशस्त्र बलों के मीडिया सेंटर से मिली जानकारी के मुताबिक, हौथी लड़ाकों ने ताज़ और होदेइदाह प्रांतों के पश्चिमी तटीय रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन दागे। हालांकि, सेना की एयर डिफेंस यूनिट ने ताज़ फ्रंट पर कई ड्रोन हवा में ही नष्ट कर दिए और बैलिस्टिक मिसाइलें भी अपने तय लक्ष्यों तक नहीं पहुंच सकीं। सूचना मंत्रालय के सहायक अवर सचिव फैयाद अलनोमान ने दक्षिणी-पश्चिमी ताज़ प्रांत के अल-वाज़ीियाह पुल पर एक बैलिस्टिक मिसाइल हमले की पुष्टि की है, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की हौथी साजिश का खुलासा होता है।
लगातार झड़पों से बढ़ा तनाव और जनहानि
क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हिंसा के कारण माक़बानह और अल-कधा इलाकों में भीषण झड़पें हुईं, जिनमें कम से कम 25 लोगों की कुल मौत हुई। इनमें 15 सरकारी सैनिक और 10 हौथी सदस्य शामिल हैं। हौथी ताकतों ने अल-अहतोउब, अल-तुवैयर, अल-कधा और जबल घाबारी जैसे इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की और ताज़ को रणनीतिक बंदरगाह शहर अल-माखा से जोड़ने वाले मुख्य सप्लाई रूट को काटने का भी प्रयास किया। यमीनी सशस्त्र बलों से जुड़े नेशनल रेजिस्टेंस संगठन ने मोखा बंदरगाह पर हमला करने आ रही एक बम से लदी नाव को बीच समंदर में ही तबाह कर दिया। मौजूदा सुरक्षा खतरों के चलते फिलहाल मोखा बंदरगाह का कामकाज स्थगित कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हौथी संकट
सूचना मंत्री मोअम्मर एर्यानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि हौथी विद्रोहियों की हरकतें अब क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं, जिसमें लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही भी शामिल है। उन्होंने दुनिया भर के बड़े देशों से अपील की है कि वे इस संकट से निपटने के लिए राजनीतिक और सैन्य समर्थन बढ़ाएं। राजनीतिक कार्यकर्ता रियाद अलदुबाई ने इस मौजूदा संघर्ष को यमन के आर्थिक ढांचे को जानबूझकर तबाह करने वाला अभियान बताया है। अप्रैल 2022 में हुए संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम के बाद से शांति वार्ताओं के विफल होने के कारण मारिब, अल-जौफ और अल-धाले जैसे कई प्रांतों में एक बार फिर से आतंकवाद और हिंसा तेजी से बढ़ रही है।