तइज़ के अल-शाकब फ्रंट पर यमन की सरकारी सेना ने हूतियों के बड़े हमले को नाकाम किया और 16 विद्रोही मारे गए

तइज़ (यमन): यमन की सरकारी सेना और स्थानीय प्रतिरोध बलों ने शुक्रवार को तइज़ शहर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित अल-शाकब फ्रंट पर हूती विद्रोहियों के एक बड़े हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया। तइज़ मिलिट्री एक्सिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच करीब आठ घंटे तक भारी मुठभेड़ चली, जिसमें 16 हूती लड़ाके मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।
इस हमले के दौरान हूती मिलिशिया किसी भी इलाके पर कब्जा करने में नाकाम रही। तइज़ के अन्य मोर्चों जैसे अल-अकरुध, अल-दबाब और जबल हन के आसपास के इलाकों में भी सैन्य तनाव देखा गया। अप्रैल 2022 में लागू हुए युद्धविराम के बाद से यह हिंसा की सबसे बड़ी लहर मानी जा रही है।
हिंसा के बीच हूतियों ने अल-शाकब में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी की। इस हमले में एक महिला की मौत हो गई और एक बच्चा घायल हो गया। तइज़ मिलिट्री एक्सिस ने यह भी बताया कि उनकी एयर डिफेंस यूनिट ने शहर के पूर्व में एक हूती सुसाइड ड्रोन को मार गिराया।
यमन वायु सेना ने हूतियों की सैन्य चौकियों और कुमुक को निशाना बनाया, जिसमें घुरब स्कूल के भीतर छिपे एक टैंक को नष्ट कर दिया गया। ये गतिविधियां 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' के तहत तेज हुई सैन्य कार्रवाइयों का हिस्सा हैं।
यमन सशस्त्र बलों के प्रवक्ता कर्नल स्टाफ माजिद अल-नज़िली ने बताया कि गठबंधन समर्थित ऑपरेशनों के तहत अब तक 17,000 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में 1,250 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जिससे करीब 700 हूती लड़ाके मारे गए और 150 से ज्यादा वाहन और सैन्य उपकरण तबाह हुए।
सऊदी सैन्य विशेषज्ञ मेजर जनरल मोहम्मद अल-हरबी ने कहा कि अब ऑपरेशन एक नए चरण में पहुंच गया है, जिसमें हूतियों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और पहाड़ी ठिकानों पर केंद्रित हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अगर सेना अल-बायदा की ऊंचाइयों तक पहुंच जाती है, जो सना की ओर देखती हैं, तो इस क्षेत्र में हूतियों की रक्षा प्रणाली ध्वस्त हो सकती है।