यमन में फिर भड़की हिंसा, सरकारी सेना ने हौथी ठिकानों पर की जबरदस्त एयरस्ट्राइक, घोषित किया किल ज़ोन.

यमन के पश्चिमी ताएज इलाके में हालात फिर से काफी तनावपूर्ण हो गए हैं जहां सरकारी सेना ने हौथी ठिकानों के खिलाफ कड़ा एक्शन शुरू किया है। इस सैन्य कार्रवाई का ऐलान 11 सितंबर 2026 को किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य अल-मोखा, कैंप खालिद और जबाल अल-नार जैसे अहम इलाकों को वापस अपने नियंत्रण में लेना है। हौथी विद्रोहियों ने हाल ही में एक बड़ा हमला करते हुए 3 सितंबर को अपनी बढ़त बनाई थी और 10 सितंबर तक रणनीतिक रूप से बेहद अहम लाल सागर के बंदरगाह शहर अल-मोखा पर कब्जा कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने कैंप खालिद बेस और जबाल अल-नार कमांड मुख्यालय को भी अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके बाद से संघर्ष काफी तेज हो गया है।
पश्चिमी ताएज में घोषित किया गया किल ज़ोन
हौथी विद्रोहियों की इन लगातार बढ़त के जवाब में यमन सरकार ने पश्चिमी ताएज में एक कड़ा कदम उठाते हुए 'किल ज़ोन' घोषित कर दिया है। इस दायरे में मुख्य रूप से ताएज-मोखा रोड और उसके आसपास के तमाम इलाके आते हैं ताकि सैन्य अभियानों को पूरी ताकत से अंजाम दिया जा सके। यमन सशस्त्र बलों के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नुजाइली ने आम नागरिकों के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक वायु सेना के ऑपरेशन चल रहे हैं, तब तक आम लोग ताएज-मोखा और मोखा-धुबाब सड़कों पर जाने से बिल्कुल बचें ताकि किसी भी अनहोनी या जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।
सऊदी अरब की तरफ से बड़े पैमाने पर हवाई हमले
यमन की सरकारी सेना की मदद के लिए सऊदी अरब ने भी मोर्चा संभाल लिया है और बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जा रहे हैं। सऊदी सेना ने अल-मोखा एयरपोर्ट के साथ-साथ ताएज, होदेइदाह, अल-जौफ और मारिब गवर्नरेट के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इस पूरे संघर्ष का दायरा अब क्षेत्रीय स्तर पर फैल चुका है और हौथी बलों ने 11 सितंबर को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पेरिमु द्वीप (मायुन) पर भी कब्जा कर लिया है। हौथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेआ ने जानकारी दी है कि समुद्री नेविगेशन उन सभी कंपनियों के जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है जो सऊदी अरब से जुड़ी हुई नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
बढ़ते तनाव और हिंसा के बीच संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 10 सितंबर को सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी थी कि देश युद्ध के एक नए और बेहद खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि इस लड़ाई की वजह से आम नागरिकों के विस्थापन में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है, जहां ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा अरेफ समेत कई नेताओं ने हौथी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। दूसरी ओर, हाल ही में हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों में 73 लोग घायल हो गए थे, जिसके बाद सऊदी अधिकारियों ने देश की रक्षा के अपने अधिकार को पूरी तरह बरकरार रखने की बात कही है।