यमन में बड़ा सैन्य एक्शन, बाब अल-मैंडब और अल-बायदा में हूती ठिकानों पर जोरदार हमला.

यमन में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी सेना ने सऊदी नीत गठबंधन के समर्थन से 21 सितंबर 2026 को बाब अल-मैंडब और अल-बायदा क्षेत्रों में हूती विद्रोहियों के ठिकानों और सप्लाई लाइनों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस सैन्य कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और सरकार ने साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आम लोग इस संघर्ष के कारण काफी डरे हुए हैं और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे हैं।
कब्ज और अल-वाज़ियाह मोर्चे पर भीषण झड़पें
सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नाज़िली ने पुष्टि की है कि सरकारी यूनिटों ने अल-बायदा प्रांत में हूती उपकरणों और लड़ाकों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इसके अलावा मोखा और ताएज़ के विभिन्न मोर्चों पर भी पोजीशनों को तबाह किया गया। पिछले 24 घंटों के दौरान हुई इस हिंसक झड़प में 30 हूती लड़ाके मारे गए और 60 से अधिक घायल हो गए। ताइज़ कमांड की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी बलों ने छह कॉम्बैट व्हीकल और दो टैंक भी पूरी तरह नष्ट कर दिए हैं। सरकार से जुड़ी जाइंट्स ब्रिगेड ने रविवार 20 सितंबर को कब्ज फ्रंट पर पांच सैन्य वाहनों को तबाह करने की जानकारी दी, जबकि नेशंस शील्ड फोर्सेस की पहली ब्रिगेड ने बाब अल-मैंडब के पास एक हूती ड्रोन को मार गिराया।
सामरिक और रणनीतिक चिंताएं बढ़ीं
यह पूरा सैन्य अभियान 3 सितंबर 2026 के बाद से शुरू हुए व्यापक संघर्ष का हिस्सा है, जब हूती गुट ने प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था। इसके जवाब में अल-जौफ और अल-बायदा में जवाबी कार्रवाई की गई। बाब अल-मैंडब जलडमरूमध्य के पास हूती लड़ाकों की बढ़ती गतिविधियों और लाल सागर तट की तरफ उनके आगे बढ़ने से सामरिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल Affairs के विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों पर कब्जे से ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अनुचित बढ़त मिल रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी खतरा मंडरा रहा है।
मानवीय संकट और विस्थापन
इस खूनी संघर्ष का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन ने 21 सितंबर को बताया कि सात प्रांतों में 129,438 लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इनमें से 11,352 लोग अकेले 18 सितंबर से 20 सितंबर के बीच विस्थापित हुए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 13 से 18 सितंबर के बीच यमन भर में संघर्ष की वजह से 680 लोग हताहत हुए, जिनमें 164 लोगों की मौत शामिल है। लहज प्रांत इस समय सबसे सक्रिय फ्रंटलाइन बना हुआ है, जहां आम जनता रोज़ाना गोलाबारी और डर के साये में जीने को मजबूर है।