यमन के वेस्ट कोस्ट पर सेना का बड़ा एक्शन, हूती ठिकानों पर सटीक हमले और कई ड्रोन तबाह.

यमन में सुरक्षा बलों ने 8 सितंबर 2026 को वेस्ट कोस्ट फ्रंट पर हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस कार्रवाई में यमन की सेना, नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस, जाइंट्स ब्रिगेड, तिहामी रेजिस्टेंस और होमलैंड शील्ड ने मिलकर काम किया। इस पूरी सैन्य कार्रवाई को यमन एयर फोर्स का पूरा साथ मिला, जिसकी अगुवाई कमांडर मेजर जनरल पायलट अब्दुलअजिल अल-मह्या कर रहे थे।
ताइज़ और होदेइदाह में विस्थापन का संकट
सेना की ये सटीक स्ट्राइक मुख्य रूप से ताइज़ प्रांत के पश्चिम में स्थित अल-कधा और अल-बारह इलाकों में हूती लड़ाकों के ठिकानों पर की गई। यमन के अल-जौफ और अल-बैदा मोर्चों पर भी इन दिनों तनाव काफी बढ़ गया है। सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने वेस्ट कोस्ट के इलाकों में 14 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, हालांकि सरकारी बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई ड्रोन्स को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। खुफिया जानकारी के मुताबिक, पश्चिमी ताइज़ में यूसुफ अल-मदानी, अबू लुकमान, अकील अल-शमी और अब्दुललतीफ हम्मौद अल-महदी जैसे कई बड़े हूती कमांडर छिपे हुए हैं, जिन्हें ईरान के अब्दुल रजा शाहलाई का समर्थन मिल रहा है।
इस ताज़ा संघर्ष की वजह से आम नागरिकों की मुसीबतें बहुत बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 72 घंटों के भीतर ताइज़ और होदेइदाह में 18,500 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलिमी के नेतृत्व वाली यमन सरकार का कहना है कि देश में सरकारी संस्थाओं को फिर से बहाल करना उनका मुख्य लक्ष्य है। हालांकि, इस बीच दोनों पक्षों की तरफ से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन और तीखी प्रतिक्रियाएं
सऊदी अरब के मंत्रिपरिषद ने यमन की संप्रभुता की रक्षा करने के अधिकार का खुलकर समर्थन किया है। वहीं दूसरी तरफ, यमन में अमेरिकी दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि हूती ताकतों को अपनी इस लगातार आक्रामकता के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ज़मीनी हालात पर नजर डालें तो इस संघर्ष का असर आम जनजीवन पर बहुत भारी पड़ रहा है और इलाके में तनाव लगातार बना हुआ है।