यमन के मोcha शहर में सरकारी सेना का बड़ा हमला, हूती लड़ाकों के ठिकानों और हथियारों को किया तबाह.

Nura Basta12 September 20263 min read23 viewsYemen
यमन के मोcha शहर में सरकारी सेना का बड़ा हमला, हूती लड़ाकों के ठिकानों और हथियारों को किया तबाह.

यमन की रियाद समर्थित सरकार ने सामरिक रूप से बेहद अहम लाल सागर के शहर Mocha में हूती लड़ाकों के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। शनिवार, 12 सितंबर 2026 को किए गए इन सैन्य हमलों में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कई वाहन और हथियार पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, साथ ही इस संघर्ष में कई मिलिशिया सदस्यों के हताहत होने की भी खबर सामने आई है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

इन प्रमुख ठिकानों को बनाया गया निशाना

यमन की सेना द्वारा की गई इन एयर स्ट्राइक और गोलाबारी में कई रणनीतिक जगहों को निशाना बनाया गया है। हमलों की चपेट में आने वाले प्रमुख ठिकानों में Mocha का बंदरगाह, जैद अल-खर्ज मॉल, जल परियोजना प्रशासन सुविधा केंद्र, मोचा-धुबाब रोड पर स्थित पशु संगरोध स्थल और शहर के उत्तरी रिंग रोड पर बने एक पूर्व सैन्य कमांडर का मुख्यालय शामिल है। इन सभी जगहों पर भारी नुकसान होने की पुष्टि की गई है, जिससे हूतियों की ताकत को बड़ा झटका लगा है।

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सेना के अधिकारी की चेतावनी और पिछले हमलों का घटनाक्रम

यमन के सशस्त्र बलों के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल माजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए आम नागरिकों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ताइज़-मोचा और मोचा-धुबाब सड़कों से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि सेना ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 से ही इन रास्तों पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी थी। इन जमीनी और हवाई हमलों से पहले, यमन वायु सेना ने 11 सितंबर को मोचा और धुबाब के इलाकों में जोरदार बमबारी की थी। इसके अलावा, हूती मीडिया ने सऊदी के नेतृत्व वाली ताकतों द्वारा मोचा के हवाई अड्डे पर हमले का दावा किया, जबकि एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि शहर के बंदरगाह पर अज्ञात मिसाइलों से छह बार हमले किए गए।

हूती नियंत्रण और वैश्विक चिंता का विषय

यह पूरा सैन्य संघर्ष उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब हूतियों ने 10 सितंबर 2026 को मोचा सहित यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया था। इसके ठीक अगले दिन यानी 11 सितंबर को उन्होंने तीन बेहद अहम और रणनीतिक द्वीपों जुकर, पेरिम (मय्युन) और हनिश पर भी अपना अधिकार जमा लिया। इन इलाकों के हाथ लगने से अब बाब अल-मदब जलडमरूमध्य पर पूरी तरह हूतियों का नियंत्रण मजबूत हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी है कि यह संघर्ष अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, क्योंकि जलडमरूमध्य के पास हूतियों की मौजूदगी से वैश्विक नौवहन की स्वतंत्रता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

मानवीय संकट और विस्थापन की स्थिति

इस लगातार जारी हिंसा और युद्ध के कारण आम लोगों का जीवन नर्क बन गया है और मानवीय हालात बेहद खराब हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की रिपोर्ट के अनुसार, इस लड़ाई की वजह से 46,000 से अधिक लोग अपना घर-बार छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। IOM प्रमुख एमी पोप ने जानकारी दी है कि प्रभावित परिवार बहुत कम सामान के साथ अपना जीवन बचाने के लिए दूसरी या तीसरी बार भागने को विवश हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र ने यह भी बताया है कि हूती विद्रोहियों ने मोचा में स्थित एक प्रमुख मानवीय सहायता परिसर पर भी कब्जा कर लिया है, हालांकि सभी संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को इस घटना से पहले ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार अब इन सभी खोए हुए इलाकों को वापस पाने के लिए एक बड़े जवाबी हमले की तैयारी कर रही है।

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