यमन में बड़ा संघर्ष, मारीब में सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों का घुसपैठ नाकाम कर 12 को मार गिराया

Sushma Kumari19 September 20262 min read24 viewsYemen
यमन में बड़ा संघर्ष, मारीब में सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों का घुसपैठ नाकाम कर 12 को मार गिराया

यमन की सरकार ने 19 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि उनकी सेना ने दक्षिण Marib के अल-फुलिहान इलाके में हूती विद्रोहियों की घुसपैठ की कोशिश को पूरी तरह से विफल कर दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कुल 12 हूती लड़ाके मारे गए और कई अन्य घायल हो गए, जिसके बाद बाकी बचे हुए विद्रोही वहां से पीछे हटने पर मजबूर हो गए। मारीब प्रांत में इन दिनों हिंसा की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं और लगातार संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं।

मारीब के कई इलाकों में चली भीषण झड़पें

शनिवार को हुई सैन्य गतिविधियों के दौरान मारीब शहर के पश्चिम में स्थित Al-Mashjah मोर्चे पर भी दोनों पक्षों के बीच भयंकर झड़पें हुईं। सरकारी बलों ने इस दौरान आगे बढ़ते हुए हूती यूनिटों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। इसके अलावा, सरकार की तरफ से की गई भारी गोलाबारी ने Wadi Dhana और Al-Balq क्षेत्रों में विद्रोहियों की घुसपैठ की हर कोशिश को नाकाम कर दिया। इन सभी ऑपरेशंस में सरकारी सेना को बड़ी सफलता मिली और उन्होंने विद्रोहियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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हूती ठिकानों पर हवाई हमले और क्षेत्रीय बढ़त

जमीनी कार्रवाई का समर्थन करने के लिए युद्धक विमानों ने कई रणनीतिक ठिकानों पर हूती विद्रोहियों के जमावड़े और रसद गतिविधियों को निशाना बनाया। इन ठिकानों में अल-जुबा जिले में पूर्व 26th Brigade के शिविर, उम्म रिश क्षेत्र और हरिब के दक्षिण में स्थित अक़बा मलाला के इलाके शामिल हैं। इसके साथ ही, अल-सुबैहा क्षेत्र के अल-अघबरा मोर्चे पर भी सरकारी सैनिकों ने स्थानीय जनजातियों के साथ मिलकर बड़ी कामयाबी हासिल की। यहाँ के सुरक्षा बलों ने Jabal Al-Bazla के साथ-साथ अल-धहोउरा और अल-सायबारा की महत्वपूर्ण चौकियों पर भी अपना कब्जा जमा लिया है।

यमन के इस चल रहे गृहयुद्ध में मारीब प्रांत की स्थिति बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि हूती विद्रोही इस गवर्नरट पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं, ताकि वे लाल सागर के रास्ते होने वाले तेल निष्कर्षण और उसके निर्यात के कामकाज पर अपनी पकड़ बना सकें। इन सभी मोर्चों पर हिंसा और झड़पें बढ़ने की वजह से स्थानीय आम नागरिकों को अपने घरों को छोड़कर बड़े पैमाने पर दूसरी जगहों पर पलायन करना पड़ा है, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।

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