यमन के विदेश मंत्री का बड़ा बयान, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की हरकतों से बाब अल-मंदाब पर मंडराया बड़ा खतरा

यमन की राजनीति और सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। 11 सितंबर 2026 को यमन की विदेश मंत्री डॉ. अफराह अल-जोउबा ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों की तरफ से लगातार मिलिट्री बढ़ाई जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि पश्चिमी तट पर जो कुछ भी हो रहा है और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को जो खतरा पैदा किया जा रहा है, वह ईरान के इशारे पर हो रहा है। यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि ईरान अपने नापाक मंसूबों को पूरा कर सके।
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुलतीफ अल-जयानी के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में डॉ. अफराह अल-जोउबा ने इस बात पर जोर दिया कि यमन के समुद्री तटों और द्वीपों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इन जगहों को क्षेत्रीय ताकतों और दुनिया भर के व्यापार पर दबाव बनाने का हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ताएज़ के पश्चिमी हिस्से और होदेइदाह के दक्षिणी इलाकों में हूती लड़ाके जो हरकतें कर रहे हैं, वे कोई छोटी-मोटी घटनाएं नहीं हैं। यह एक बहुत बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके जरिए लाल सागर के दक्षिणी छोर तक खतरे का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सख्त कदम उठाने की अपील
यमन की सरकार ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि बाब अल-मंदाब की सुरक्षा करना सिर्फ यमन की अपनी संप्रभुता का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आधिकारिक तौर पर अपील की है कि इन खतरों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के बहुत सख्त कदम उठाए जाएं।
इस मामले में संयुक्त राष्ट्र में यमन के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल्ला अल-सादी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि हूती समूह एक नई स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और नौकायन को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
जमीनी हालात और सैन्य टकराव
मैदान पर हालात दिन-ब-दिन बहुत खराब होते जा रहे हैं। 10 सितंबर 2026 को हूती लड़ाकों ने बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया। इसके ठीक अगले दिन यानी 11 सितंबर को रणनीतिक रूप से बेहद अहम द्वीप पेरिम (मायुन) और धुआबाब नाम के तटीय शहर को भी अपने कब्जे में ले लिया। इन हमलों के बाद सऊदी अरब की सेना ने जवाबी कार्रवाई की और मोचा में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए।
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, इस भारी हिंसा और हमलों की वजह से एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है। पिछले हफ्ते की शुरुआत से लेकर अब तक 46,000 से ज्यादा आम नागरिक अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित जगह जाने को मजबूर हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय चिंता और कूटनीतिक हलचल
एक तरफ जहां ईरान ने खुलकर हूती हमलों का समर्थन किया है और तथाकथित अवैध नाकाबंदी खत्म करने की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ गई है। खबरें मिल रही हैं कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से संपर्क किया है। उन्होंने हूती विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका से मदद और दखل देने की अपील की है।
हालांकि हूती संगठन से जुड़े एक निकाय की तरफ से यह दावा किया गया है कि सऊदी अरब के जहाजों को छोड़कर बाकी देशों के कमर्शियल जहाजों के लिए जलडमरूमध्य से गुजरना पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन फिर भी दुनिया भर के देशों को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और तेल केरोसिन के रास्ते में कोई बड़ी रुकावट ना आ जाए।