यमन ने ईरान को दी दो टूक, कहा- क्षेत्रीय लड़ाई का अड्डा नहीं बनेगा हमारा देश.

यमन की विदेश मंत्री Afrah Alzouba ने एक बड़ा और कड़ा बयान देते हुए साफ किया है कि उनका देश ईरान के हाथों का मोहरा नहीं बनेगा और न ही किसी क्षेत्रीय रंजिश को सुलझाने की जगह बनेगा। यह अहम बयान सबसे पहले यमन के विदेश मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक X अकाउंट पर 18 सितंबर 2026 को जारी किया गया था, जिसे बाद में रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक को दिए गए एक इंटरव्यू में विस्तार से समझाया गया। विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि यमन का भविष्य केवल और केवल वहां के नागरिक अपने राष्ट्रीय मार्ग और सरकारी संस्थानों के जरिए तय करेंगे।
हूती मिलिशिया की हरकतों पर कड़ी आपत्ति
मंत्री Afrah Alzouba ने आतंकवादी हूती मिलिशिया के कामों की कड़ी निंदा की है, खासकर पश्चिमी तट और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास बढ़ रही उनकी हिंसक गतिविधियों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इन हरकतों की वजह से आम लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और देश के साथ-साथ पूरे इलाके की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अहम समुद्री रास्ते भी शामिल हैं। मंत्री ने साफ तौर पर ईरान की तरफ से हूती मिलिशिया को मिलने वाली सैन्य मदद को खारिज कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे ईरान की तरफ से मिल रहे फंड, हथियारों और तकनीकी मदद को तुरंत रोकें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी ताकत के क्षेत्रीय नुकसान की भरपाई के लिए यमन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा बैठकें
इन सभी हालातों के बीच, विदेश मंत्री ने 16 सितंबर 2026 को यमन में अमेरिका के प्रभारी Neil Hop के साथ बैठक की थी, जिन्होंने यमन की सरकार को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया। इसके अलावा, 18 सितंबर 2026 को जेद्दा में एक बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन की चौथी योजना बैठक हुई, जिसमें क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 41 देशों ने हिस्सा लिया। ये घटनाक्रम हूती मिलिशिया द्वारा 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा करने के बाद सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 के संघर्ष विराम के बाद से चल रही लड़ाइयों की वजह से 115,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। सऊदी अरब की तरफ से एक ड्रोन हमले को हवा में ही नाकाम करने की खबर के बाद तनाव अभी भी काफी बना हुआ है, जबकि हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने 17 सितंबर 2026 को मक्का को निशाना बनाकर किए गए एक अलग ड्रोन हमले के आरोपों से इनकार किया था।