यमीनी विदेश मंत्रालय ने दी सऊदी अरब को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जहां यमन के सना स्थित प्रशासन ने सऊदी अरब के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। यमनी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक तीखा बयान जारी करते हुए सऊदी नीत गठबंधन के सैन्य अभियानों और नाकाबंदी के जवाब में 'पारस्परिक प्रतिक्रिया' देने की चेतावनी दी है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
नाकाबंदी और सैन्य हमलों पर गरमाई सियासत
सना प्रशासन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यमन पर लगाई गई नौसेना की नाकाबंदी पूरी तरह से अवैध है। उनका तर्क है कि इस नाकाबंदी को हटाने का एकमात्र तरीका निरंतर प्रतिरोध और जवाबी हमले जारी रखना है। मंत्रालय ने सऊदी अरब पर यह भी आरोप लगाया कि वह इस्लामी पवित्र स्थलों को लेकर भ्रामक और आक्रामक कथा गढ़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी शासन अपनी छवि चमकाने के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रहा है।
तेज हुई सैन्य गतिविधियां और हमले
यह कूटनीतिक तल्खी ऐसे समय में सामने आई है जब मैदानी स्तर पर संघर्ष में भारी तेजी देखी गई है। सऊदी नीत गठबंधन ने खमीस मुशायट और जाजान जैसे शहरों को निशाना बनाकर दागी गई कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है। इसके अलावा, नजराण में एक स्कूल को नुकसान पहुंचने और मदीना के तैबा पावर स्टेशन पर ड्रोन हमले की भी खबरें हैं। इन हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव और अधिक गंभीर हो गया है।
आगामी संघर्ष और लाल सागर का सामरिक महत्व
रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष के इस नए दौर में दोनों ओर से भारी सैन्य अभियानों को अंजाम दिया जा रहा है। एक तरफ जहां भारी संख्या में हवाई हमले किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लाल सागर तट के पास बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के करीब एक बड़े जवाबी अभियान की तैयारियां भी चल रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यमन और सऊदी सीमा पर तनाव और अधिक गहरा सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।