यमन के पश्चिमी तट पर भड़की हिंसक झड़पें, सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच हुई भारी गोलीबारी.

Nura Basta3 September 20262 min read27 viewsYemen
यमन के पश्चिमी तट पर भड़की हिंसक झड़पें, सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच हुई भारी गोलीबारी.

यमन के पश्चिमी तट पर 3 सितंबर 2026 को सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गईं। यह लड़ाई यमन के ताएज और हुदैदाह इलाकों में हुई और कई जगहों पर यह संघर्ष लगातार 15 घंटे तक चलता रहा। इस दौरान आम नागरिकों की बस्तियों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए गए जिससे आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।

मिसाइल और ड्रोन हमलों से मचा हड़कंप

यमीनी आर्मी मीडिया सेंटर के मुताबिक हूती विद्रोहियों ने अल-मुख शहर और अल-खोखा जिले जैसे घनी आबादी वाले इलाकों पर 10 से 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन दागे। हालांकि यमन की एयर डिफेंस फोर्स ने इनमें से कई ड्रोन्स को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। इसके अलावा सरकारी बलों ने अल-मुख बंदरगाह के पास हूती सैनिकों की दो विस्फोटक भरी यानी बोबी-ट्रैप्ड नावें भी पूरी तरह तबाह कर दीं। सरकारी सेना ने अपनी कार्रवाई के दौरान अल-कदहा और मक्बानह इलाकों में जवाबी हमले किए जो ताएज के पश्चिम में स्थित हैं। इन जवाबी कार्रवाई में 16 से 50 विद्रोही हताहत हुए जिनकी सटीक संख्या की पुष्टि अभी की जा रही है।

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सैनिकों की तैनाती और विस्थापन का संकट

हालात को काबू में करने और सरकारी मोर्चों को मजबूत बनाने के लिए अल-अमालिका ब्रिगेड और होमलैंड शील्ड फोर्स के अतिरिक्त सैनिक मौके पर भेज दिए गए हैं। इस ताजा सैन्य तनाव की वजह से अल-कदहा इलाके से लगभग 387 परिवार अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं। यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलिमी ने हूती विद्रोहियों की इन हरकतों को आतंकवादी गतिविधियों करार दिया और कड़ा सैन्य जवाब देने की बात कही। इसके साथ ही प्रधानमंत्री शाये मोहसेन अल-जिंदानी ने पुष्टि की कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और सेना को पूरी मदद दे रही है।

क्षेत्रीय तनाव और अंदरूनी कलह

इस बीच ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आ रही हैं कि सना में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीब 75 सैन्य विशेषज्ञ पहुंचे हैं जो हूती विद्रोहियों की ताकत को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। दूसरी ओर ताएज में रक्षा तैयारियों को लेकर तारिक सालेह और अल-इस्लाह पार्टी से जुड़े गुटों के बीच आपसी मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र के दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने पहले ही अगस्त महीने में चेतावनी दी थी कि साल 2022 के संघर्ष विराम के बाद से यमन एक बार फिर से बड़े पैमाने पर युद्ध की तरफ बढ़ने का सबसे बड़ा खतरा झेल रहा है।

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