यमन में हूती ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू, बढ़ा तनाव

Nura Basta4 October 20262 min read0 viewsYemen
यमन में हूती ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू, बढ़ा तनाव

यमन की राजनीति और सुरक्षा मामलों में एक बड़ा मोड़ आ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़े देशव्यापी सैन्य अभियान का आगाज कर दिया है। इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य देश के उन सभी हिस्सों पर फिर से राज्य का नियंत्रण स्थापित करना है, जो लंबे समय से हूती नियंत्रण में चले आ रहे थे। इस नई सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सुगबुगाहट तेज कर दी है और आम नागरिकों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं.

रियाद से की गई बड़ी घोषणा

यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलीमी ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद से इस देशव्यापी सैन्य अभियान की शुरुआत का ऐलान किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार हूती गुटों के लगातार हो रहे उल्लंघनों का डटकर मुकाबला करेगी। साथ ही, सरकार ने उन सभी हूती लड़ाकों के लिए एक आम माफी की घोषणा भी की है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। यह कदम सितंबर के अंत में की गई आम लामबंदी की अपील के बाद उठाया गया है.

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सटीक हमलों से दहले कई शहर

यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुजैली ने पुष्टि की कि सरकारी बलों ने राजधानी सना, उत्तर-पश्चिमी सादा और दक्षिण-पश्चिम के तािज़ शहर में महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों का मकसद हूती लड़ाकों की ऑपरेशनल क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करना बताया गया है। सना के स्थानीय निवासियों ने इन हमलों के दौरान जोरदार धमाकों की आवाजें सुनने की पुष्टि की है। हालांकि, दूसरी ओर हूती संचालित मीडिया नेटवर्क ने इन हमलों के लिए सीधे तौर पर सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं को नुकसान पहुंचने का दावा भी किया है.

क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय संकट

यह पूरा घटनाक्रम एक-दूसरे पर किए जा रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच तेजी से आगे बढ़ रहा है। रणनीतिक सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, लाल सागर तट और रणनीतिक बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। इस ताजा और भीषण संघर्ष के कारण दो लाख से अधिक आम नागरिक अपने घरों से विस्थापित होने को मजबूर हो चुके हैं। ये बेघर लोग तािज़ और अदन के बीच अस्थाई शिविरों में शरण लेने की तलाश में भटक रहे हैं, जिससे इलाके में एक गंभीर मानवीय संकट गहराता जा रहा है.

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