मक्का पर हमला करने की कोशिश, यमन मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ उठाया कड़ा कदम

इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने की कोशिश पर यमन सरकार ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी है। 20 सितंबर 2026 को यमन के बंदोबस्त और मार्गदर्शन मंत्रालय ने एक औपचारिक बयान जारी किया। इस बयान में हूती मिलिशिया के इस प्रयास को एक बड़ा पाप और गंभीर अपराध बताया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह के हमलों ने सभी सीमाओं को पार कर दिया है और यह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब सऊदी अरब ने लगभग 15 से 16 सितंबर 2026 के आसपास मक्का की तरफ दागी गई हूती बैलिस्टिक मिसाइल या ड्रोन को हवा में ही नाकाम करने और नष्ट करने की घोषणा की थी।
मंत्रालय का बयान और ईरान पर गंभीर आरोप
यमन मंत्रालय की तरफ से बात करते हुए मंत्री शेख तुर्की अल-वदाई ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की हरकतें यह बताने के लिए काफी हैं कि इस मिलिशिया ने अब इस्लामिक मूल्यों को पूरी तरह छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन पवित्र स्थलों की कीमत पर अपने क्षेत्रीय प्रभाव का इस्तेमाल करके ईरान के हितों को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। क्षेत्रीय मामलों पर बात करते हुए मंत्रालय ने ओमान के ग्रैंड मुफ्ती शेख अहमद बिन हमद अल-खलीली और लीबिया के मुफ्ती शेख सादिक अल-घरियानी के बयानों की भी 20 सितंबर को कड़ी आलोचना की। मंत्रालय का मानना है कि इन धार्मिक नेताओं के हालिया बयानों से हूती मिलिशिया को गलत तरीके से नैतिक समर्थन मिल रहा है और इससे यमन के अंदर चल रही तबाही की असली तस्वीर दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जताई गई चिंता
यमन के अधिकारियों ने हूती विद्रोहियों पर यह भी आरोप लगाया कि वे यमन की जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए कर रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर दोनों पवित्र मस्जिदों यानी मक्का और मदीना की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हालांकि हूती मिलिशिया ने मक्का को निशाना बनाने की बात से साफ इनकार किया है और उनका दावा है कि उनकी सैन्य कार्रवाई केवल तेल ठिकानों और सैन्य अड्डों तक ही सीमित रहती है। इसके बावजूद, यमन के मंत्रालय ने दुनिया भर के जाने-माने धार्मिक विद्वानों से अपील की है कि वे अपनी सोच पर फिर से विचार करें और यमन के असली विद्वानों से सलाह लें ताकि इस मिलिशिया के गलत इतिहास पर पर्दा डालने से रोका जा सके। इसी बीच, 20 सितंबर 2026 को मक्का और मदीना पर बार-बार आ रहे खतरों को लेकर मुस्लिम वर्ल्ड लीग को भी कई औपचारिक निंदा पत्र भेजे गए हैं।