Yemen News: यमनी नौसेना ने रेड सी में हूती समूह के 4 सुसाइड Boats को किया तबाह.

लाल सागर यानी Red Sea के रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले Hanish और Zuqar द्वीपों के पास सोमवार, 31 अगस्त 2026 को यमन की सरकारी नौसेना ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। यमनी नौसेना ने नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस के साथ मिलकर हूती समूह के चार विस्फोटक से भरे सुसाइड बोट्स को बीच रास्ते में ही रोक लिया और उन्हें तबाह कर दिया। ये सभी नौकाएं सरकार के नियंत्रण वाले उन द्वीपों की तरफ बढ़ रही थीं जो दक्षिणी लाल सागर के बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स की निगरानी करते हैं। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा बलों ने अपनी चौकसी और ज्यादा बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह के समुद्री हमले को समय रहते नाकाम किया जा सके।
सरकारी एजेंसियों ने की पुष्टि
इस घटना की आधिकारिक पुष्टि सरकारी समाचार एजेंसी Saba और 2 December समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है। सैन्य सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी थी कि पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की समुद्री गतिविधियों में अचानक काफी तेजी देखी जा रही थी। इस घटना से ठीक एक दिन पहले यानी रविवार, 30 अगस्त 2026 को भी यमनी सुरक्षा बलों ने एक रिमोट से संचालित होने वाली हूती विस्फोटक नौका को नष्ट किया था, जिसे समंदर में चल रहे कमर्शियल ट्रैफिक और जहाजों को निशाना बनाने के लिए भेजा गया था। हालांकि इन ताजा और बड़ी कार्रवाइयों के बाद अभी तक हूती समूह की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यमन में चल रहा है संघर्ष
लाल सागर और यमन के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार लड़ाई और तनाव का माहौल बना हुआ है। सरकारी सेनाएं लगातार ड्रोन और आर्टिलरी हमलों के जरिए विद्रोहियों के ठिकानों को जवाब दे रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ हूती गुट की तरफ से भी लगातार मिसाइल और ड्रोन कैंपेन चलाए जा रहे हैं। साल 2023 के आखिर से लेकर अब तक हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों और शिपिंग ट्रेड को लगातार निशाना बनाने का एक सिलसिला सा बना रखा है, जिससे इस रास्ते से व्यापार करने वाले देशों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस क्षेत्र से सफर करने वाले लोगों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच भी इस तनाव को लेकर चिंता का माहौल रहता है, क्योंकि इसका असर ग्लोबल सप्लाई चेन और समुद्री सुरक्षा पर सीधा पड़ता है।