यमन के पश्चिमी तट पर हौथी विद्रोहियों का तांडव, मानवाधिकार उल्लंघन के 958 मामले आए सामने.

यमन में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और आम नागरिकों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है जिसमें यमन के पश्चिमी तट के फ्रंटलाइन इलाकों में हौथी मिलिशिया द्वारा किए गए जुल्मों की पूरी कहानी बयां की गई है। इस गंभीर स्थिति ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
958 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज
यमेनी नेटवर्क फॉर राइट्स एंड फ्रीडम यानी YNRF की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हौथी लड़ाकों की तरफ से हालिया क्षेत्रीय कब्जों के बाद नागरिकों पर कुल 958 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए हैं। यह पूरी रिपोर्ट 3 सितंबर से 11 सितंबर 2026 के बीच के समय की है। हिंसा की यह घटनाएं मुख्य रूप से हेस, अल-खव्वाह, अल-वाजीइया, मोज़ा, मोखा और धुबाब जिलों में सामने आई हैं, जहां आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन 958 उल्लंघनों में निर्दोष नागरिकों की सीधी हत्याओं के 177 मामले भी शामिल हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें 38 मौतें स्नाइपर की गोलीबारी से हुईं, 42 घायल लोगों की फील्ड पर हत्याएं की गईं, 53 सैन्य कैदियों को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया गया, 23 लोगों की मौत अंधाधुंध गोलाबारी के कारण हुई, 12 लोग सीधी गोलीबारी का शिकार बने और 9 लोगों को हौथी वाहनों ने कुचल दिया। इसके अलावा, नेटवर्क ने 212 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है और 39 लोग अभी भी लापता हैं, जिनके जबरन गायब किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
घरों और सरकारी संपत्तियों पर लूटपाट
हिंसा का यह दौर यहीं नहीं रुका, बल्कि लोगों को घरों से पकड़ने का सिलसिला भी जोरों पर रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 213 लोगों को गिरफ्तार किया गया या उनका अपहरण कर लिया गया। इसके साथ ही, 356 घरों और अन्य सुविधाओं पर छापेमारी और लूटपाट की गई। इनमें 11 सरकारी ठिकाने, 37 पूरी तरह लूटे गए घर, 282 आंशिक रूप से लूटे गए घर, 30 civiles गाड़ियां और 17 मोटरसाइकिलें शामिल हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि परिवारों के सामने या स्वास्थ्य केंद्रों के अंदर की गई ऐसी हत्याएं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बहुत बड़ा उल्लंघन हैं।
विस्थापन का बड़ा संकट और पलायन
इस भयानक संघर्ष के कारण आम जनता को अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिमी यमन में इस हमले की वजह से लगभग 50,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि सितंबर महीने की शुरुआत से जारी इस लड़ाई के कारण 80,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। जैसे-जैसे यह संघर्ष और गहराता जा रहा है, हौथी ताकतों ने मोखा शहर और लाल सागर के पेरिम और ज़ुकार जैसे रणनीतिक द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है।
यमन सरकार की फौजें इस समय खुद को फिर से संगठित कर रही हैं, जबकि सैन्य अधिकारियों ने आम नागरिकों को तािज़-मोखा और मोखा-धुबाब जैसे अहम रास्तों का इस्तेमाल न करने की सख्त चेतावनी दी है। इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी और आधिकारिक डेटा के लिए आप ReliefWeb Report पर जा सकते हैं।