यमन में बड़ा ऐलान, हाउदी विद्रोहियों से मुकाबला करने के लिए आम लामबंदी और भर्ती शुरू.

यमन में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और देश को बचाने के लिए बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। 12 सितंबर 2026 को यमनी पॉपुलर रेजिस्टेंस के सुप्रीम काउंसिल ने देश भर के सभी मुक्त गवर्नरेट और डायरेक्टरट में आम लामबंदी और व्यापक भर्ती की घोषणा कर दी है। इस नए कदम को देश के इतिहास का एक बहुत ही जरूरी मोड़ बताया जा रहा है, जिसमें आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे आगे आएं और देश की रक्षा के लिए एकजुट हो जाएं।
हाउदी मिलिशिया पर गंभीर आरोप और नागरिकों से अपील
एक आधिकारिक बयान में रेजिस्टेंस ने हाउदी मिलिशिया पर तीखा हमला बोला है। उन पर आरोप लगाया गया है कि वे लगातार देश की रिपब्लिकन व्यवस्था, सरकारी संस्थानों और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं। काउंसिल ने सभी यमनी नागरिकों से कहा है कि वे तय किए गए रेजिस्टेंस कैंपों में जाकर स्वेच्छा से भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनें। इसके अलावा ताएज डायरेक्टरट के लोगों से खास तौर पर तुरंत लामबंदी में शामिल होने की अपील की गई है, ताकि उन इलाकों को वापस लिया जा सके जिन पर हाल ही में हाउदियों ने कब्जा कर लिया था।
सशस्त्र बलों का समर्थन और राजनीतिक नेतृत्व से मदद की मांग
पॉपुलर रेजिस्टेंस ने यमनी सशस्त्र बलों के प्रति अपना समर्थन पूरी तरह से जारी रखने की बात कही है। उनका कहना है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि देश के सभी सरकारी संस्थान फिर से बहाल नहीं हो जाते और राजधानी Sana'a समेत हर जगह से हाउदी नियंत्रण खत्म नहीं हो जाता। इसके साथ ही काउंसिल ने डॉ. रशाद अल-अलिमी की अगुवाई वाले पॉलिटिकल लीडरशिप काउंसिल से यह मांग की है कि वे सशस्त्र बलों और रेजिस्टेंस को सभी जरूरी संसाधन और साजो-सामान उपलब्ध कराएं ताकि हाउदी तख्तापलट को पूरी तरह से नाकाम किया जा सके।
मोचा शहर के हालात और अस्तित्व की लड़ाई
यह पूरी घोषणा रिपब्लिक चैनल की उस रिपोर्ट के बाद सामने आई है जिसमें 12 सितंबर 2026 को मोचा शहर के पतन की बात कही गई थी। ब्रॉडकास्टर्स का यह दावा था कि सरकार समर्थित ताकतें बिना किसी मुकाबले के ही शहर से पीछे हट गईं और इस दौरान ब्रिगेडियर जनरल तारेक सालेह की मौजूदगी को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए गए। पॉपुलर रेजिस्टेंस ने मौजूदा हालात को जीने और मरने की लड़ाई करार दिया है। उनका साफ कहना है कि देश की सुरक्षा और रक्षा के लिए अब आम जनता, सशस्त्र बलों और रेजिस्टेंस समूहों का आपस में पूरी तरह से सहयोग करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है।