यमन के राष्ट्रपति ने किया आम गोलबन्दी का ऐलान, हूथी लड़ाकों को वापस लौटने पर माफी का बड़ा मौका.

Nura Basta25 September 20262 min read56 viewsYemen
यमन के राष्ट्रपति ने किया आम गोलबन्दी का ऐलान, हूथी लड़ाकों को वापस लौटने पर माफी का बड़ा मौका.

यमन में चल रहे तनाव के बीच राष्ट्रपति ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है और देश के लोगों से अपील की है कि वे सरकार के साथ खड़े हों। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को यमन के प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल यानी PLC के चेयरमैन डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलिमी ने एक औपचारिक भाषण के दौरान आम गोलबन्दी का ऐलान कर दिया। यह घोषणा उन्होंने सितंबर क्रांति की 64वीं वर्षगांठ के मौके पर देश को संबोधित करते हुए की है।

सेना का साथ देने की अपील और आम माफी का ऐलान

अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने आम जनता से कहा कि वे देश की सुरक्षा और सेना का समर्थन करें ताकि देश की रक्षा पूरी मजबूती से की जा सके। इसके साथ ही सरकार ने उन सभी लोगों के लिए एक आम माफी योजना का भी ऐलान किया है जो पहले हूथी गुट के बहकावे में आ गए थे। जो भी व्यक्ति 25 सितंबर 2026 तक हूथी मिलिशिया से अपना नाता तोड़ लेगा और हिंसा का रास्ता छोड़ देगा, उसे सरकार की तरफ से पूरी सुरक्षा और माफी दी जाएगी। इस योजना के तहत सेना और सुरक्षा बल के उन कर्मचारियों को उनकी पुरानी नौकरी और सभी अधिकार वापस मिलेंगे जो संवैधानिक सरकार के पास वापस लौट आएंगे।

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अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार और क्षेत्रीय तनाव

सरकार की तरफ से बताया गया कि हूथी गुट की हरकतें देश के लिए बहुत खतरनाक होती जा रही हैं और इस हिंसा को रोकने के लिए यह फैसला लेना जरूरी था। राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और सऊदी नीत गठबंधन से यह अपील की है कि वे यमन की सरकार और उसकी सेना का साथ दें ताकि देश में शांति फिर से कायम की जा सके। उनका कहना था कि यमन के सरकारी संस्थानों को बचाना पूरे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है।

मैदान पर सैन्य कार्रवाई और मानवीय संकट

दूसरी तरफ, यमन की सरकारी सेना ने भी 25 सितंबर 2026 को ताइज़ के पश्चिमी हिस्से में हूथी गुट के सप्लाई रूट को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में हूथी गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा सितंबर महीने की शुरुआत से ही पश्चिमी तट पर बढ़ते संघर्ष के कारण मारिब में हालात खराब हैं और 130,000 से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। हालात को देखते हुए यूनाइटेड किंगडम यानी यूके ने संयुक्त राष्ट्र की अपील पर 13 मिलियन डॉलर से अधिक की आपातकालीन सहायता देने का वादा किया है, क्योंकि मानवीय संकट की मुख्य वजह हूथी गुट की आक्रामकता ही है।

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