यमीनी राष्ट्रपति रशाद अल-अलिमी की हुती विद्रोहियों को कड़ी चेतावनी, कहा- हर हमले की चुकानी होगी भारी कीमत

यमन के राष्ट्रपति Rashad Al-Alimi ने 9 सितंबर 2026 को एक बहुत कड़ा बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश में किसी भी तरह का तनाव और हमला अब बिना कीमत चुकाए नहीं जाने वाला है। उन्होंने बताया कि हुती आंदोलन ने खुद ही युद्ध का रास्ता चुना है इसलिए उन्हें ही इन सभी हरकतों के बुरे नतीजे भुगतने होंगे। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि यमन की सरकार ने खुद से यह लड़ाई या तनाव शुरू नहीं किया था बल्कि उनके पास अपने नागरिकों की रक्षा करने और देश की संप्रभुता को बचाने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील
राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह मांग की है कि वे आगे आएं और हुती विद्रोहियों को देश में बढ़ रहे संघर्ष के लिए जिम्मेदार ठहराएं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को पूरी सख्ती के साथ लागू करने की बात कही ताकि इन हमलों पर रोक लगाई जा सके। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सऊदी अरब और ऊर्जा संयंत्रों पर बढ़े हमले
अपने संबोधन में Rashad Al-Alimi ने इस बात पर जोर दिया कि हुती विद्रोहियों की आक्रामकता अब सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रही है बल्कि इसका दायरा काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि इन लोगों ने Saudi Arabia, आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं और देश के ऊर्जा संयंत्रों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यह बढ़ता हुआ तनाव सीधे तौर पर ईरान के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। राष्ट्रपति ने चेताया कि इन सब हरकतों की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन यानी समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार और जहाजों की आवाजाही को भी सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिससे गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
सैनिकों की बहादुरी की तारीफ और क्षेत्रीय सुरक्षा
यमन के राष्ट्रपति ने अपनी सेना यानी सशस्त्र बलों के काम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश के सैनिक हर मोर्चे पर डटकर मुकाबला कर रहे हैं और दुश्मनों के हमलों का करारा जवाब देने की पूरी क्षमता रखते हैं। सेना ने एक बार फिर से अपनी ताकत दिखाते हुए स्थिति को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए इस बात पर फिर से जोर दिया कि यमन, Saudi Arabia और आसपास के दूसरे पड़ोसी देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। जब तक पूरा क्षेत्र सुरक्षित नहीं होता, तब तक शांति स्थापित करना मुमकिन नहीं है।