Yemen Crisis: जिबूती में शरण लेने पहुंचे 3,000 से ज्यादा यमनी नागरिक, अंतरराष्ट्रीय मदद की लगाई गुहार.

यमन में चल रहे भीषण संघर्ष और हिंसक झड़पों के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। जान बचाने के लिए पिछले एक हफ्ते के दौरान 3,000 से अधिक यमनी नागरिकों ने खतरनाक समुद्री रास्ता पार करके जिबूती में शरण ली है। बाब अल-मदब जलडमरूमध्य को पार करने वाले इन लोगों में महिलाओं और बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है, जो छोटे और असुरक्षित जहाजों में सवार होकर पहुंचे हैं।
हिंसा और विस्थापन का बढ़ता दायरा
यह पूरा संकट अंसार अल्लाह समूह और यमनी सरकारी बलों के बीच नए सिरे से भड़की झड़पों के बाद पैदा हुआ है। खासतौर पर 11 सितंबर 2026 को पेरिम और जुकार द्वीपों पर कब्जे के बाद हालात और बिगड़ गए। अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अंदर भी इस संघर्ष की वजह से 100,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। 16 सितंबर 2026 तक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर प्रवासन (IOM) ने 2,776 व्यक्तिगत आगमन की पुष्टि की थी, और यूएनएचसीआर के आंकड़ों के अनुसार 19 सितंबर 2026 तक यह कुल आंकड़ा लगभग 3,000 तक पहुंच गया। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप IOM की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
जिबूती के शरणार्थी शिविरों पर बढ़ा दबाव
समुद्र पार करके आने वाले ये शरणार्थी मुख्य रूप से जिबूती के उत्तरी शहर ओबोक के अलावा खोर अंगर, मौलहौले और गोडोरिया में उतर रहे हैं। मरकजी शरणार्थी गांव मूल रूप से 5,000 लोगों के रहने के लिए बनाया गया था, लेकिन मौजूदा समय में यह अपनी पूरी क्षमता पर चल रहा है। इस शिविर में इस समय 2,700 से ज्यादा यमनी शरणार्थी और 1,500 इरिट्रियन नागरिक रह रहे हैं। इस मानवीय स्थिति की पूरी जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट में दी गई है।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की प्रतिक्रिया
जिबूती के आंतरिक मंत्री उमर अब्दी सईद के नेतृत्व में देश के गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वित्तीय सहायता के लिए आधिकारिक अपील की है। मंत्रालय का कहना है कि यह संकट तेजी से देश के मौजूदा संसाधनों से बाहर हो रहा है। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक आने वाले हफ्तों में शरणार्थियों की यह संख्या बढ़कर 5,000 से 10,000 के बीच पहुंच सकती है। सरकार ने यूनिसेफ और IOM जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ मिलकर आपातकालीन राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, जिसके तहत लोगों को गर्म खाना, साफ पानी और स्वच्छता की सुविधाएं दी जा रही हैं। IOM महानिदेशक एमी पोप ने इस बात पर जोर दिया कि इस मानवीय संकट को तुरंत दाताओं का ध्यान चाहिए, जबकि यमन में IOM के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वहां स्थानीय संसाधन लगभग पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे नागरिकों की सुरक्षा के लिए संघर्ष को कम करें और मानवीय सहायता के रास्ते सुगम बनाएं।