जिबूती के ओबोक कैंप में यमनी शरणार्थियों का संकट बढ़ा, चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी

यमन में चल रहे तनाव और हिंसा के कारण अपना घर बार छोड़ने को मजबूर हुए यमनी शरणार्थी अब जिबूती के उत्तर में स्थित Obock camp में बहुत बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस कैंप में रहने वाले परिवारों के पास अपने बच्चों के इलाज के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं और मेडिकल सामानों की भी भारी कमी हो गई है। अल जज़ीरा के पत्रकार Hassan Razak ने 26 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी थी कि विस्थापित लोगों के लिए इस पूरे इलाके में केवल एक ही क्लिनिक मौजूद है और सभी लोग उसी की सीमित सुविधाओं पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से बढ़ी मुश्किलें
सितंबर 2026 के दौरान यमन के पश्चिमी तट से भागकर आने वाले लोगों की संख्या में अचानक बहुत तेजी आई है, जिसमें ज्यादातर महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल हैं। जिबूती के उत्तरी तट पर 16 सितंबर तक कुल 2,776 लोग पहुंच चुके थे और अनुमान यह लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुल शरणार्थियों की संख्या 5,000 से 10,000 के बीच तक पहुंच सकती है। लोगों के इस तरह अचानक पहुंचने की वजह से वहां की जरूरी सेवाओं पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ गया है, और मार्कज़ी शरणार्थी गांव यानी Markazi refugee village की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो गई है.
अंतरराष्ट्रीय संगठन और स्थानीय एजेंसियां कर रही हैं मदद
फंड की भारी कमी होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और स्थानीय अधिकारी इस संकट को कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। UNFPA ने माताओं के स्वास्थ्य और संक्रमण से निपटने के लिए 16 सितंबर तक ओबोक मेडिकल-हॉस्पिटल सेंटर यानी CMH को प्रसव स्वास्थ्य से जुड़ी सामग्रियां और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराई थीं। इसके अलावा, Qatar Charity ने भी 21 सितंबर से अपनी शुरुआती मानवीय सहायता को बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिसके तहत आपातकालीन चिकित्सा देखभाल भी दी जा रही है। इस समय UNICEF जिबूती के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर मार्कज़ी स्वास्थ्य पोस्ट को फिर से खोलने और उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरी मदद कर रहा है.
बड़ी राहत के लिए करोड़ों डॉलर की दरकार
विस्थापित परिवारों की मदद करने के लिए UNHCR ने एक औपचारिक अपील जारी की है, जिसमें यह बताया गया है कि इन सभी लोगों की सहायता के लिए लगभग 14 मिलियन डॉलर की जरूरत है। इस राहत कार्य में जिबूती सरकार, शरणार्थियों और आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए राष्ट्रीय कार्यालय यानी ONARS, संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA और इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस जैसे कई बड़े साझेदार संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा SOS Children’s Villages ने भी हाल ही में बच्चों के लिए दूध यानी इन्फेंट फॉर्मूला और साफ-सफाई से जुड़ी जरूरी चीजें वितरित की हैं, जिसके बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb Report पर देखी जा सकती है.